राधिका की डायरी ​"यादों का बसेरा और बिछड़ती ज़िंदगी: एक खामोश इंतज़ार"

 

"यादों का बसेरा और बिछड़ती ज़िंदगी: एक खामोश इंतज़ार"

डायरी के शब्द (Original Text from Diary)

"यादों की किस्मत वो क्या जाने,

जो खुद यादों को दिया करते हैं।

यादों का मतलब उनसे पूँछो, जो

यादों के सहारे जिया करते हैं।

क्या लिखूँ अपनी जिन्दगी के

बारे में दोस्तों, वो ही बिछड़ गये

जो जिन्दगी हुआ करते थे।

आपकी जुदाई का गम रह-रह के तड़पाने लगा,

आँखों से हुई बारिस धड़कनों को भिगोने लगा।

तन्हाइयों ने हमें ऐसे घेरा की दिल भी

हमारा हमें छोड़ कर जाने लगा।

क्या कहें इस तन्हाई में हम,

कैसे जीते हैं आपकी याद में हम।

पल-पल तड़पाती है आपकी प्यारी-प्यारी बातें,

और इस बेचैन दिल को हर पल आपके प्यार बहलाते हम।

सदियों से चाह थी जिस प्यार को पाने की,

दिल में ख्वाहिश थी जिस शख्स को अपनाने की।

नहीं जानते थे हम की किसी मोड़ पर

मिलेंगी हमें खुशियाँ सारे जमाने की।"

English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

The Refuge of Memories

"How could they know the fate of memories—those who only bestow memories upon others? Ask the true meaning of remembrance from those who survive solely on its support.

What can I write about my life, friends? Those very people have drifted away who once were the very essence of my existence.

The sorrow of our separation has begun to torment me incessantly; the rain from my eyes has started to drench my heartbeats. Loneliness has surrounded me in such a way that even my own heart seems ready to abandon me.

What can I say in this solitude, or how I survive within your memory? Your sweet words haunt me every moment, and I try to soothe this restless heart with the thought of your love.

For centuries, I longed for the love I now seek; my heart held a deep desire to make that one person my own. I never knew that at some turn of fate, I would find the happiness of the entire world."

मज़बूत शीर्षक (Title)

"यादों का बसेरा और बिछड़ती ज़िंदगी: एक खामोश इंतज़ार"

निष्कर्ष और मज़बूत सवाल (Conclusion & Strong Question) ❓

निष्कर्ष: आपकी ये पंक्तियाँ एक गहरे अकेलेपन को बयां करती हैं। जब वो इंसान चला जाता है जो आपकी 'ज़िंदगी' था, तब सिर्फ यादें ही जीने का सहारा बनती हैं। आपकी आखिरी की लाइनें उम्मीद की एक छोटी सी किरण दिखाती हैं कि शायद कहीं सारी खुशियाँ मिल जाएँ।

सवाल: "अक्सर यादें हमें कमज़ोर बनाती हैं, लेकिन क्या आपको लगता है कि कभी-कभी यही यादें हमें मुश्किल वक्त

 से लड़ने की ताकत भी देती हैं?"

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भाग 4 = एक नया मोड़ टर्निंग प्वाइंट

' भाग 1= पाँचवी पास ने क्यों शुरू किया आयुर्वेद का बिज़नेस? मेरी कहानी!'

भाग 3 = शुभ दीपावली जैसे दीपावली में दीपक की रोशनी से घर में उजाला हो जाता है वैसे ही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सब के जीवन से दुख परेशानी चिंता उदासी हमेशा हमेशा के लिए चली जाए खुशी मुस्कुराहट सुख समृद्धि धन वैभव हमेशा हमेशा के लिए रोशनी बन कर आ जाए शुभ दीपावली