राधिका की डायरी: मुश्किलों में हौसला, भाई का संबल और समझदारी की सीख
राधिका की डायरी: मुश्किलों में हौसला, भाई का संबल और समझदारी की सीख बाइक दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण हमारे सामने एक नई व्यावहारिक समस्या खड़ी हो गई थी। अब गाड़ी पूरी तरह बिगड़ चुकी थी, जिसकी वजह से मेरे बेटे को सुबह अपनी कंप्यूटर क्लास के लिए मजबूरन पैदल ही जाना पड़ा। सिर्फ इतना ही नहीं, जो डिलीवरी बॉय का काम उसने इतनी मेहनत और ज़िद से शुरू किया था, वह काम भी गाड़ी न होने के कारण पूरी तरह रुक गया था। घर में एक अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी। तभी अचानक मेरे बेटे ने अपनी आँखें झुकाए हुए बेहद ग्लानि भरे स्वर में मुझसे कहा, "मम्मी, मुझे और ज़्यादा देखकर गाड़ी चलानी चाहिए थी ना? मेरी ही गलती थी।" मैंने उसकी तरफ देखा, उसके मन में चल रहे पछतावे को महसूस किया और एक माँ की तरह प्यार से समझाते हुए कहा, "हाँ बेटा, बिल्कुल देखकर चलानी चाहिए। और सिर्फ देखकर ही नहीं, बल्कि रोड के सभी नियमों (Traffic Rules) का पूरी तरह पालन भी करना चाहिए। हमेशा याद रखो, जाने के समय अपनी लेफ्ट (बाएँ) की तरफ से जाना चाहिए और आने के समय हमेशा राइट (दाएँ) की तरफ से आना चाहिए। सबसे बड़ी बात यह है कि जब भ...