राधिका की डायरी: रिजेक्शन का सामना, अनहोनी की दस्तक और माँ का इम्तिहान
राधिका की डायरी: रिजेक्शन का सामना, अनहोनी की दस्तक और माँ का इम्तिहान इसि तरहा धीरे-धीरे, कदम दर कदम हमारा काम आगे बढ़ता रहा। कहते हैं ना कि सफलता की राह कभी सीधी नहीं होती। इस लोकल फील्ड वर्क के दौरान कई बार मुझे बहुत उदास भी होना पड़ता था। फील्ड में हर रोज़ नए लोगों से मिलना और उनके सीधे 'रिजेक्शन' (अस्वीकृति) का सामना करना दिल को तोड़ देता था। लोग कभी बात नहीं सुनते थे, तो कभी बिना सुने ही मना कर देते थे। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मैंने रिजेक्शन का एक नया मतलब निकाला—मेरे लिए 'No' (ना) का मतलब सिर्फ इनकार नहीं, बल्कि 'Next Opportunity' (अगला अवसर) था। मैं हर 'ना' को अगले कस्टमर तक पहुँचने की सीढ़ी समझकर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ती रही। लेकिन ज़िंदगी जब एक तरफ संभल रही होती है, तो दूसरी तरफ से कोई न कोई बड़ी परीक्षा आपके सामने आकर खड़ी हो जाती है। वह एक आम दिन था, मैं अपने काम के सिलसिले में एक बेहद ज़रूरी मीटिंग में बैठी हुई थी। यह मीटिंग एक सरकारी अस्पताल के एक सम्मानित आयुर्वेदिक डॉक्टर के केबिन में चल रही थी। हम बहुत ही गंभीरता से अपने का...