भाग 78 = अकेलेपन की गंगाजली और टूटा हुआ शरीर
अकेलेपन की गंगाजली और टूटा हुआ शरीर
यह आपकी कहानी का सबसे भावुक और व्यक्तिगत मोड़ है। राधिका का अकेले अपने पति के लिए 'गंगाजली' की पूरी विधि निभाना और उसके बाद उसके परिवार का व्यवहार—यह दिखाता है कि उसका संघर्ष केवल बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि अपनों से भी था।
मैं इस पूरे विवरण को के लिए मार्मिक, प्रेरणादायक और निर्णायक रूप में ड्राफ़्ट कर रहा हूँ, जिसमें राधिका की बीमारी का दर्द और उसके अकेलेपन को दर्शाया जाएगा।
🏡 घर वापसी: 10 दिन की ड्यूटी के बाद
हेडक्वार्टर से 10 दिन की लंबी ड्यूटी पूरी करने के बाद, राधिका 3 दिन की छुट्टी लेकर डेढ़ सौ किलोमीटर दूर अपने घर पहुँची। थकान के कारण वह पहले दिन तो कुछ नहीं कर पाई, लेकिन दूसरे दिन वह सीधे बाज़ार गई। वहाँ से गंगाजली के लिए ज़रूरी सारा सामान ख़रीदा: फल, फूल, मिठाई, तेल, अनाज, घी, धूप, अगरबत्ती, नारियल, और पाँचों ब्राह्मणों के लिए कपड़े, चप्पल, छाता, बर्तन, और कंबल।
अगले ही दिन, उसने अकेले गंगाजली की पूरी विधि शुरू की।
😭 अकेली औरत और गंगाजली
पंडित जी को बुलाया गया, पाँच ब्राह्मणों को नियुक्त किया गया। राधिका ने अकेले खाना बनाया, ब्राह्मणों को फल-मिठाई खिलाई और भोजन कराया। दुनिया में शायद वह पहली औरत थी जिसने गंगाजली की पूरी पूजा अकेले की। उसे सपोर्ट करने या साथ देने के लिए कोई एक भी व्यक्ति मौजूद नहीं था।
उसने गाय, कुत्ते, कौवे और मृत व्यक्ति के लिए पत्तल निकाला। इसके बाद ही वह स्वयं भोजन कर पाई। पाँचों ब्राह्मणों को दक्षिणा के रूप में ₹101 और एक-एक गमछा देकर विदा किया। जिस मुख्य पंडित ने पूजा करवाई थी, उसे ₹551 और पूरे कपड़े (कुर्ता-पायजामा के कपड़े, गमछा, बर्तन, कंबल, जूते-चप्पल—जो भी गोदान का सामान था) दान किए। तब जाकर उसने थोड़ी चैन की सांस ली।
⚔️ रिश्तों से अंतिम विच्छेद (Final Break)
वह उस दिन बहुत थक चुकी थी, लेकिन थकान से ज़्यादा उसे उस अकेलेपन का दर्द था।
वह सोच रही थी कि उसके घरवाले (माँ-बाप, भाई) चाहते तो इस पूजा के बाद अपनी शादी में जा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह इसलिए, क्योंकि राधिका उनके लिए 'एग्ज़िस्ट' (Exist) ही नहीं करती थी।
उसी दिन राधिका ने प्रण ले लिया: "आज के बाद न वह माँ-बाप के घर जाएगी और न भाइयों के घर। बिना बुलाए तो बिल्कुल नहीं!" यह उस दिन का दिन है और आज का दिन है—वह उनके घर नहीं गई।
वह सोचने लगी कि उसका पति हर तरह से उसे सताता था, मारता-पीटता था, खाने-पीने और कपड़ों का ख़र्च तक नहीं देता था। इस पूरी दुनिया में कोई 'माई का लाल' नहीं था जो उसके कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होकर कह सके कि "राधिका, तुम चिंता मत करो, मैं हूँ।"
🏥 शरीर का टूटना
घर पर ही खाना खाने के बाद वह शाम को थोड़ा आराम कर पाई। अगले दिन उसे जंगल का काम शुरू करने (कीड़े पालन) के लिए हेडक्वार्टर वापस जाना था।
पर एक और समस्या उसके सामने खड़ी हो गई: पैसा ₹1 भी नहीं बचा था।
और सबसे बड़ी समस्या—उसकी तबीयत ज़्यादा बिगड़ गई। पति की मृत्यु के बाद जिम्मेदारियों को पूरा करने की होड़ में उसने अपनी सेहत पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया।
तबीयत इतनी बिगड़ी कि स्थानीय डॉक्टर ने उसे 100 किलोमीटर दूर शहर में रेफर कर दिया। वहाँ जाने पर पता चला कि उसकी किडनी अपनी जगह पर नहीं थी। एक किडनी अपनी जगह से दूर थी और दूसरी किडनी उस जगह को भरने की कोशिश में सूज चुकी थी। इस कारण एक किडनी का आकार छोटा और दूसरी का बड़ा हो गया था। बीच में गैप होने के कारण पेट में गैस (Air) बहुत ज़्यादा बनती थी, जिससे वह एक टाइम का खाना भी नहीं पचा पाती थी।
पेट में सूजन इतनी थी कि वह ठीक से बैठ नहीं सकती थी।
उसे शहर के अस्पताल में कम से कम 8 दिन भर्ती रहना पड़ा। 8 दिन बाद थोड़ा सुधार आया, उसकी छोटी बहन एक दिन के लिए आई और दवाई-गोली समझाकर चली गई।
घर आकर राधिका ने 8 दिन और आराम किया। थोड़ा ठीक लगने पर, वह अपनी दवाई-गोली साथ लेकर काम शुरू करने के लिए हेडक्वार्टर पहुँची। वह पूरी तरह से ठीक नहीं हुई थी।
💡 निष्कर्ष और सीख
रिश्तों के टूटने और शरीर के टूटने के बीच, राधिका ने संघर्ष को चुना। अकेले गंगाजली करके उसने यह साबित कर दिया कि उसे किसी सहारे की ज़रूरत नहीं है, लेकिन उसकी यह ज़िद उसके शरीर को महंगा पड़ गई। ₹7000 की सैलरी में भी खुद को नज़रअंदाज़ करने का अंजाम उसे अस्पताल के बिस्तर पर मिला। अब देखना यह है कि यह कमज़ोर शरीर क्या उसे 50 किलोमीटर दूर कीड़े पालन के उस नए जंगल वाले काम को पूरा करने देगा या नहीं।
देखते हैं राधिका आगे क्या करती है अगले भाग में...
🔥 यह Post का ड्राफ़्ट है। क्या आप मुझे Post के लिए अगला मोड़ बता सकती हैं? (नए काम में क्या समस्या आई, या उसने कैसे काम शुरू किया?)
नमस्ते! यह कहानी राधिका की साहस, दृढ़ता और अकेलेपन को दर्शाती है। यह पढ़कर लगता है कि वह एक बहुत ही मजबूत महिला हैं जो जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों को अकेले निभाती हैं।
यह कहानी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर समाप्त होती है, जहाँ राधिका को अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्या और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।
🌟 राधिका की कहानी के मुख्य बिंदु:
* अकेलेपन में जिम्मेदारी: हेडक्वार्टर से 150 कि.मी. दूर आकर, राधिका ने अपने पति के लिए गंगाजली की पूरी पूजा और व्यवस्था अकेले संभाली, जिसमें पाँच ब्राह्मणों का भोजन, दान और सभी धार्मिक क्रियाएं शामिल थीं।
* पारिवारिक अलगाव: अपने परिवार (मां-बाप और भाइयों) की उदासीनता और गैर-हाजिरी को देखकर उन्होंने उनसे दूर रहने का प्राण लिया।
* असहनीय वैवाहिक जीवन: उनके पिछले वैवाहिक जीवन की पीड़ा (पति द्वारा सताया जाना, मारा-पीटा जाना, आर्थिक खर्च न उठाना) का उल्लेख है, जिसने उनके अकेलेपन को और गहरा किया।
मां का स्पर्श मां क्या होती है मां कैसी होती है मां किसे कहते हैं मां को भगवान का दूसरा रूप क्यों कहा जाता है सिर्फ माही क्यों समझ सकती है बच्चों की तकलीफ मां के अलावा कहीं कोई है ही नहीं अनुपमा की होती है जो बच्चा जब पहली सांस उसके गर्भ में लेता है तो वह उसे महसूस कर सकती है वह मन ही होती है जो गर्भ में होने वाले बच्चों की हर मोमेंट को समझ जाती है वह मन ही होती है जो को जानते हैं कि उसके गर्भ में जो बच्चा है वह क्या चाहता है उसे क्या खाना है वह क्या मांग रहा है उसी की है अकॉर्डिंग बस मन का खाना होता है उसी की इच्छाएं होती हैं पर जब यह इच्छाएं भी पूरी ना हो तो भी मन उसे बच्चों को अपने प्रेम और अपनी ममता से ही। मानती है जब एक मां बच्चे को जन्म देती है बच्चों को पता नहीं होता कि वह कहां है क्या कर रहा है उसे क्या चाहिए वह क्या कहना चाहता है या उसे क्या महसूस हो रहा है कि उसे भूख लगी है कैसे टॉयलेट लगी है कि बाथरूम जाना है कि उसके आसपास क्या है उसके पास पास चाहे जहर हो चाहे सांप बिच्छू हो चाहे शेर चीता भालू हो बच्चों को कुछ पता नहीं होता वह मन ही होती है जो बच्चे की रक्षक बनकर उसकी उसे स्थिति पर उसकी हमेशा ढाल बनती है उसकी भूख का एहसास मां को पहले होता है उसकी रोने का एहसास मां को पहले होता है बच्चों को क्या चाहिए मां पहले से जानते हैं बच्चा कैसे हरकत कर रहा है उसकी एक्टिविटी पर मां का हमेशा ध्यान रहता है चाहे बच्चा कितना भी बड़ा क्यों ना हो जाए बुरा क्यों ना हो जाए फिर इस मन को पता होता है की बच्चों को क्या चाहिए या वह सुखी है यह दुखी है मायूस है खुदा से कि उसके मन में क्या चल रहा है सब कुछ जो बच्चा बोलना नहीं जानता तब भी मन उसको जानती है कि उसको क्या चाहिए ऐसी ही होती है मां लेकिन एक राधिका थी जिसको मां का स्पर्श पता ही नहीं था क्योंकि जब से उसने अपने आप को जाना तब से उसके पास तो मां थी नहीं क्योंकि बच्चे अपने आप को 8 9 साल के बाद से ही अपने आप को जानते हैं उसके बाद से मां-बाप को समझते हैं पहचानते कोशिश करते हैं अपनी दुनिया को जानने की अपने आसपास की लोगों को समझने की रिश्तो को समझने की और इस समय तो राधिका ने अपनी मां को खो दिया था तो क्या जान पाती की मां क्या होती है मां का प्यार के होता है मां अपने बच्चों को दुखी क्यों नहीं देख सकती मां अपने बच्चों के दुख में दुखी होती है और मां अपने बच्चों की सुख में सूखी होती है वह बच्चा खाना खा ले तो मां का पेट भर जाता है बच्चा भूख है तो मन एक और भी अंदर नहीं डाल सकती वह मन ही होती है लेकिन राधिका राधिका तो मां बनी लेकिन अपने बच्चों के लिए कुछ ना कर सके आज वह ऐसी स्थिति पर है जहां उसके पति का देहांत हो गया उसके बच्चों को सबसे ज्यादा उसकी जरूरत है लेकिन वह चाह कर भी अपने बच्चों के सर पर हाथ नहीं रख सकती जबकि उसने पूरा जीवन अपने बच्चों के लिए जिया और काटा एक एक पल उसने अपने बच्चों के बारे में सोचा हर एक समय खाने के समय सोने के समय उसने सिर्फ अपने बच्चों को याद किया पर आज आज सिर्फ उसके बच्चों को उसकी जरूरत थी लेकिन उसका ससुराल वाले उसके सामने दल बने हुए थे दीवार बने हुए थे वह बच्चों को उससे मिलने नहीं दे रहे थे इसके अलावा उनसे बात भी नहीं करने दे रहे थे कॉल नहीं करने दे रहे थे राधिका बहुत मजबूर हो गई थी राधिका के अंदर मां के गुण तो कूट-कूट के भरे हुए थे लेकिन उसने अपनी मां के कर्तव्य को अपने बच्चों के प्रति निभाने से चूक गई निभाया सोचा किया लेकिन पास में नहीं रह पाई सिर्फ एक बंदे के कारण सिर्फ उसके एक पति के कारण और उसके नहीं रहने पर भी आज बच्चे परेशान है और राधिका भी परेशान है
* स्वास्थ्य संकट: जिम्मेदारियों को पूरा करने की होड़ में लगी राधिका की तबीयत बिगड़ गई।
* किडनी की समस्या: जांच में पता चला कि उनकी एक किडनी अपनी जगह पर नहीं थी, और दूसरी किडनी में सूजन थी, जिससे पेट में गैस/सूजन की गंभीर समस्या थी।
* इलाज और रिकवरी: उन्हें 100 कि.मी. दूर शहर में 8 दिन भर्ती रहना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने घर पर 8 दिन और आराम किया।
* कार्य पर वापसी: पूरी तरह ठीक न होने पर भी, वह अपनी दवाइयाँ साथ लेकर वापस हेडक्वार्टर में जंगल के काम (कीड़े पालन) के लिए निकल पड़ीं।
यह एक बहुत ही भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानी है
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