भाग 5: बचपन की यादें: मिट्टी के खेल और मासूम ख्वाब
Radhika’s Diary: Part 5 — A Neighbor’s Grace and the Summer of Haveli
The Veil of Respect and the Sardar Ji’s Promise
At 2 AM, Reena stood before her neighbor, the elderly Sardar Ji, whom she respected like a father. Even in her distress, she maintained her ghunghat (veil). With tears in her eyes, she shared the news of Govind’s arrest.
The warmth of humanity shone through when Sardar Ji comforted her like a daughter. "Go home, child. Take care of the children. I’ll send Balbir to the station; they will bring Govind back." When Reena tried to offer the ₹20,000 she had brought for bail, Sardar Ji refused to take a single penny, assuring her that everything would be managed.
The Cold Dawn of Indifference
Reena waited, hungry and sleepless, until 5 AM. When Govind finally walked through the door, there was no gratitude, no question about how she managed, and no concern for whether she had eaten. He simply walked to his room and fell asleep.
Reena realized that this was her life now—a cycle of crises and cold shoulders. She couldn't leave for her parents' home permanently; she had three children and their future to think about. So, she did what most women of her time did: she adapted to the pain.
Escape to the Haveli: The Joy of Summer
Time heals, or at least it passes. Soon, the scorching heat brought the much-awaited summer vacations. For Radhika and her siblings, this meant the annual pilgrimage to their maternal grandmother’s (Nani) house—a grand, haveli-like estate.
The excitement was electric. Packing bags, preparing tiffins, and the long auto-ride to Nani’s village felt like a journey to another world. The haveli was a bustling hub of three separate houses:
- The eldest Mama's house.
- Nani and Nana’s house with the youngest Mama.
- The Grand-Uncle's (Bade Pitaji) house, where Reena’s middle brother lived.
With aunts, uncles, and a dozen cousins all gathered under one roof, the air was filled with laughter, games, and the delicious aroma of vacation treats. For a brief moment, the shadows of Govind’s temper and the police station were forgotten.
Conclusion
This chapter transitions from the darkness of a jail cell to the golden light of childhood memories. Reena’s bravery saved the night, but the family's reunion at the haveli promised a temporary sanctuary. But in such large families, every joy often hides a secret. What awaits Radhika in the corridors of her Nani’s haveli?
राधिका का आपसे सीधा संवाद:
"वो रात कड़वी थी, लेकिन नानी के घर की वो छुट्टियाँ आज भी मेरी सबसे खूबसूरत यादें हैं।
- क्या आपको लगता है कि सरदार जी जैसे पड़ोसी ही उस दौर में भगवान का असली रूप थे?
- पति की इतनी बेरुखी के बाद भी रीना का मुस्कुराकर बच्चों को नानी के घर ले जाना—क्या यह एक औरत की सबसे बड़ी शक्ति है?
- क्या नानी के उस 'हवेली' जैसे घर में कोई ऐसी याद छिपी है जिसने आगे चलकर मेरी ज़िंदगी बदल दी?
अगले भाग (Part 6) में मैं आपको ले चलूँगी उस हवेली की शरारतों और उन रिश्तों के बीच, जहाँ मेरी मासूमियत ने आख़िरी बार खुलकर सांस ली थी। मेरे साथ इस सफर पर चलें। 🙏📖"
📖 भाग 5: सरदार जी की मदद और मायके की तैयारी
1. रात 2 बजे सरदार जी का दरवाजा
रीना ₹20,000 लेकर घर से बाहर निकल गई, पर उसे लगा कि बिना साधन के रात 2 बजे वह कैसे जाएगी, और इतनी रात को उसका अकेले थाना जाना भी उचित नहीं होगा।
- रीना के घर से सटकर ही एक बिल्डिंग में सरदार जी रहते थे। उनके दो बेटे थे (एक बड़ा बेटा और एक छोटा बेटा), दो बहुएँ थीं, और एक छोटी बेटी थी, जिसकी अभी शादी नहीं हुई थी।
- सरदार जी के बेटों के साथ गोविंद का उठना-बैठना काफी अच्छा था, और बहुओं के साथ रीना का भी अच्छा बोलचाल और अच्छी कनेक्टिविटी थी।
- रीना के बच्चों का भी सरदार जी के बच्चों के साथ काफी घनिष्ठता थी। सरदार जी की पत्नी ('मम्मी जी') भी बहुत मिलनसार थीं।
- सरदार जी की एक माँ भी थीं, जो बहुत उम्र की थीं और व्हीलचेयर पर बैठी रहती थीं। उनकी उम्र लगभग 110 साल थी।
- रीना को उस समय सरदार जी के यहाँ मदद के लिए जाना ही सही लग रहा था।
2. रीना का घूँघट और सरदार जी का सहारा
रीना ने सरदार जी के घर की बेल बजाई। रात काफी होने के कारण शायद किसी ने घंटी की आवाज़ नहीं सुनी। फिर रीना ने लगातार तीन-चार बार घंटी बजाई।
- तभी सरदार जी ने दरवाजा खोला। रीना सरदार जी को ससुर जैसे मानती थी, इसलिए उसने उनके सामने घूँघट किया हुआ था।
- सरदार जी ने पूछा कि "क्यों पुत्री, इतनी रात गई? गोविंद झगड़ा करके आया है क्या?"
- तभी रीना ने रोते हुए कहा, "बाबूजी, उन्हें पुलिस पकड़ कर ले गई है। मैं अकेले थाने कैसे जाऊँ? इसलिए आपके पास आई हूँ।"
- सरदार जी ने कहा, "चिंता न करें पुत्री, मैं अभी बलबीर (बेटा) को भेजता हूँ थाने। गोविंद को ले आएँगे। तू घर जाकर आराम कर, बच्चों का ख्याल रख।"
- तब रीना ने जो पैसे लाई थी, वह देते हुए कहा, "बाबूजी, जमानत में पैसे तो लगेंगे ना, तो आप यह रख लीजिए।"
- सरदार जी ने कहा, "सब हो जाएगा पुत्री, तू फ़िक्र न कर। थोड़ी देर में ही गोविंद को ले आएँगे।"
- तब रीना ने चैन की साँस ली और घर वापस आ गई।
3. रात गई, बात नहीं बनी
रीना को नींद कहाँ आती? अब तक रीना ने खाना भी नहीं खाया था। लगभग तीन घंटे हो गए। अब तो सुबह के 5:00 बजने वाले थे।
- गोविंद घर आया। उसने पूछा भी नहीं कि कैसे किया? क्या किया? खाना खाया कि नहीं खाया? चुपचाप जाकर अपने कमरे में जाकर सो गया।
- रीना की जिंदगी ऐसे ही उतार-चढ़ाव के साथ चलती रही। कुछ दिन में रीना भी इन सब चीजों की आदी हो गई। उसके पास दूसरा कोई रास्ता भी तो नहीं था।
- वह क्या करती? मायके पर भी जाकर बैठ तो सकती नहीं थी। तीन बच्चे थे उसके। अगर वह जाती तो उन बच्चों का क्या होता, उनके भविष्य का क्या होता?
4. मायके की तैयारी और बच्चों का उत्साह
राधिका भी ठीक होकर स्कूल जाने लगी थी। धीरे-धीरे समय बीत रहा था और अब गर्मियों की छुट्टियों के दिन आ गए थे।
- बच्चों की छुट्टी होती थी तो हर साल छुट्टियों में वह अपनी नानी के घर जाते थे। रीना के मायके।
- बच्चे भी इस गर्मी की छुट्टी का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते रहते थे, क्योंकि इन छुट्टियों में ही तो उन्हें मस्ती, मज़ा, खेलकूद, और दंगा करने का मौका मिलता था।
- मामा, मौसी, नानी, नाना, मामी, और बहुत सारे बच्चे एक साथ मिलते थे, बहुत मजा आता था, बहुत खेलते थे।
- उनकी नानी/नाना का घर कुछ हवेली जैसा था, उन्हें वहाँ जाकर बहुत अच्छा लगता था।
- रीना भी अब मायके जाने की तैयारी में जुट गई थी।
5. गंतव्य और पारिवारिक मिलन
अब सब भी राधिका की नानी के यहाँ पहुँचने के लिए उत्सुक हो रहे थे। वह बस अब कल सुबह निकलने ही वाले थे नानी के यहाँ जाने के लिए।
- जैसे ही दूसरा दिन हुआ, सुबह हुई, राधिका की माँ ने सास के लिए और गोविंद के लिए खाना बनाया। बच्चों के लिए कुछ टिफिन खाने के लिए और पानी बोतल रखा और घर से निकल गए।
- उन्होंने ऑटो से नानी के घर जाने के लिए यात्रा शुरू की।
6. रीना का विस्तारित परिवार
रीना के 3 भाई थे, पर एक भाई को रीना के बड़े पिताजी ने गोद ले लिया था।
- तो फिलहाल राधिका के दो मामा थे, और एक मौसी थी जो रीना से बड़ी थीं। रीना की और उनकी शादी एक साथ हुई थी।
- अभी दोनों मामा की शादी भी हो चुकी थी। फिलहाल अभी सभी लोग—रीना की बड़ी बहन (मौसी) अपने बच्चों के साथ—छुट्टी मनाने आए थे।
- बच्चों को तो बहुत मजा आ रहा था यहाँ पर।
- तीन घर थे:
- एक घर में राधिका के बड़े मामा रहते थे।
- एक घर में राधिका के नाना-नानी, छोटे मामा-मामानी और उनके बच्चे रहते थे।
- और एक घर में रीना के बड़े पिताजी, बड़ी मम्मी और उन्होंने जो रीना के मंझले भाई को गोद लिया था, वह, उनकी बीवी और उनके तीन बच्चे थे।
- पउदाहरण: गोविंद का बेरुखी से सो जाना और रीना का "मायके पर भी जाकर बैठ तो सकती नहीं थी" वाला विचार उसकी मजबूरी को दर्शाता है।
- 2. मानवीय कनेक्शन (The Sardar Ji's Help): रात 2 बजे पड़ोसी सरदार जी का तुरंत मदद के लिए तैयार हो जाना (और ₹20,000 लौटा देना) एक सकारात्मक मानवीय पहलू दिखाता है। यह तनाव के बीच एक राहत की साँस देता है।
- 3. विषय परिवर्तन और राहत (Change of Topic): कहानी अचानक तनाव से निकलकर गर्मी की छुट्टियों के उत्साह में चली जाती है। यह बच्चों की मस्ती, हवेली जैसा घर, और बड़े पारिवारिक मिलन का वर्णन करके पाठक को एक खुशनुमा और नॉस्टैल्जिक माहौल में ले जाता है।
- 4. विस्तार और पृष्ठभूमि (Family Expansion): आपने रीना के पूरे विस्तारित परिवार (तीन भाई, मौसी, तीन घर, बड़े पिताजी) का जो विवरण दिया है, वह पाठक को इस नए माहौल में पूरी तरह से स्थापित करता है। यह किसी भी धारावाहिक के अगले सीज़न की तरह लगता है।
- निष्कर्ष: यह भाग तनाव, साहस और ख़ुशी का मिश्रण है। यह दर्शकों को यह जानने के लिए मजबूर करेगा कि छुट्टियों में इस बड़े परिवार के बीच क्या होने वाला है!: कहानी की शुरुआत एक गंभीर संकट (रात 2 बजे पति की गिरफ़्तारी, राधिका की बीमारी) से होती है। रीना का साहसिक फ़ैसला और फिर गोविंद का सुबह आकर बिना कुछ पूछे सो जाना—ये तीव्र भावनात्मक उतार-चढ़ाव पाठक को बांधे रखते हैं। पाठक को रीना के दर्द और मजबूरी का एहसास होता है।
- उदाहरण: गोविंद का बेरुखी से सो जाना और रीना का "मायके पर भी जाकर बैठ तो सकती नहीं थी" वाला विचार उसकी मजबूरी को दर्शाता है।
- 2. मानवीय कनेक्शन (The Sardar Ji's Help): रात 2 बजे पड़ोसी सरदार जी का तुरंत मदद के लिए तैयार हो जाना (और ₹20,000 लौटा देना) एक सकारात्मक मानवीय पहलू दिखाता है। यह तनाव के बीच एक राहत की साँस देता है।
- 3. विषय परिवर्तन और राहत (Change of Topic): कहानी अचानक तनाव से निकलकर गर्मी की छुट्टियों के उत्साह में चली जाती है। यह बच्चों की मस्ती, हवेली जैसा घर, और बड़े पारिवारिक मिलन का वर्णन करके पाठक को एक खुशनुमा और नॉस्टैल्जिक माहौल में ले जाता है।
- 4. विस्तार और पृष्ठभूमि (Family Expansion): आपने रीना के पूरे विस्तारित परिवार (तीन भाई, मौसी, तीन घर, बड़े पिताजी) का जो विवरण दिया है, वह पाठक को इस नए माहौल में पूरी तरह से स्थापित करता है। यह किसी भी धारावाहिक के अगले सीज़न की तरह लगता है।
निष्कर्ष: यह भाग तनाव, साहस और ख़ुशी का मिश्रण है। यह दर्शकों को यह जानने के लिए मजबूर करेगा कि छुट्टियों में इस बड़े परिवार के बीच क्या होने वाला है!
अगला कदम:
यह 'भाग 5' का ड्राफ्ट है, जिसमें रीना का साहस, गोविंद की बेरुखी और बच्चों का उत्साह सब कुछ शामिल है।
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