​भाग 3: बचपन की यादें: स्कूल का पहला दिन और वो डर

 


राधिका का सवाल और अगली कड़ी:

​"मेरी माँ ने मेरे लिए मौत से लड़ाई लड़ी, गीले कपड़ों में मीलों पैदल चलीं... लेकिन उस घर की दीवारों के पीछे एक और सच था।

  1. ​क्या आपको लगता है कि एक औरत की 'मन्नत' में इतनी ताक़त होती है कि वह विज्ञान को भी पीछे छोड़ दे?
  2. ​गोविंद का वो रूप—एक पल प्यार और दूसरे पल शराब और मारपीट—क्या यह एक बच्चे के मन पर गहरे घाव नहीं छोड़ता?
  3. ​वो रात के 12 बजे... उस दिन ऐसा क्या हुआ जिसने हमारे नए घर की खुशियों को हमेशा के लिए बदल दिया?

​अगले भाग (Part 4) में मैं उस भयानक रात का सच बताऊँगी जिसने हमारी ज़िंदगी की दिशा बदल दी। बने रहिये मेरे साथ। 🙏📖"

Radhika’s Diary: Part 3 — A Mother’s Penance and the Midnight Shadow

The Hidden Wounds and a Father’s Love

​The day Reena struck Radhika out of frustration when little Sahil got hurt, Radhika cried herself to sleep. Being her father’s favorite, she usually stayed awake until Govind returned home, refusing to eat without him.

​That night, Govind arrived late, calling out for her as always, "Radhika! Where are you?" When he found her sleeping, he stroked her forehead and kissed her with a tenderness that masked the other, darker side of his personality. Govind was a provider, but he was also a man of volatile temper. His addiction to alcohol often led to violence against Reena, leaving her heart as bruised as her spirit.

The New Home and the Shadow of Sickness

​They had recently shifted into their new house, a dream realized, but the celebration was cut short. Radhika fell dangerously ill. The doctors diagnosed it as Typhoid, but the pain in her stomach remained a mystery. As her condition worsened, Reena, already burdened with the care of her mother-in-law and the endless chores of the household, turned to the only power she trusted—faith.

The Grueling Vow: 11 Kilometers of Devotion

​Reena took a vow that defied physical limits. Every morning at 5 AM, before the world stirred, she would head to a temple 11 kilometers away. She would bathe in a river half a kilometer further, and then, in dripping wet clothes, carry sacred water and soil back to the temple. She walked kilometers in those wet garments, shivering but resolute, just to bring back the "sacred soil" to apply on Radhika’s forehead.

​For 11 days, she performed this silent, agonizing penance. Slowly, as if by a miracle, Radhika’s health began to improve. Even the grandmother, worried by Reena’s fading strength, warned her, "If you fall ill, who will hold this house together?" Reena only nodded, her eyes fixed on her recovering daughter.

The Midnight Arrival

​The crisis seemed to pass, but a new tension was brewing. One night, as the clock struck midnight, Govind was still not home. The silence of the new house felt heavy, as if waiting for a storm that was about to break the stillness of 12 AM.

Conclusion

​Reena pushed herself to the absolute edge of physical suffering to save her child. Between the demands of a traditional household and the fear of a volatile husband, she stood as a lone warrior. But as Govind approaches the house at midnight, the atmosphere shifts from prayer to apprehension. What happened on his way home?

The Question for You

"Is a mother’s love measured by the miles she walks or the silent blows she takes to keep her family’s world from falling apart?"

राधिका की डायरी भाग 3: माँ का तप और गोविंद की देरी

1. गोविंद का प्यार और रीना का त्याग


एक दिन खेलते-खेलते साहिल को चोट लग गई और इस कारण रीना ने राधिका को बहुत मारा। उस दिन राधिका रोते-रोते सो गई। राधिका अपने पापा की लाडली थी। जब तक उसके पापा नहीं आ जाते, वह जागती रहती थी और खाना भी नहीं खा पाती थी।


 * उस दिन गोविंद बहुत देर से आए। उनकी आदत थी कि कहीं से भी बाहर से आते थे तो वह राधिका को ही आवाज़ लगाते थे, "राधिका! राधिका! कहाँ हो?"


 * आज राधिका पापा की आवाज़ सुनकर भी नहीं आ रही थी।


 * तब उन्होंने रीना से पूछा कि "राधिका सो गई क्या?" तब रीना ने हाँ में सिर हिला दिया।


 * फिर राधिका को सोते हुए देखकर, उसके माथे पर हाथ फेरा और झुककर उसके माथे को चूमते हुए उसे बड़े प्यार से देखने लगे।


 * उन्होंने रीना से पूछा, "राधिका ने खाना खाया या नहीं?" रीना ने कहा, "हाँ, मैंने उसे खिला दिया है। उसकी तबीयत थोड़ा आज ठीक नहीं थी।"


 * वह वहाँ से आ गए और खाना खाने बैठकर घर की ही थोड़ी चर्चा करने लगे, फिर सो गए।


2. घर का संघर्ष और नई समस्या


कभी-कभी गोविंद शराब भी पिया करते थे और रीना के साथ मारपीट भी करते थे। इस बात से रीना बहुत दुखी रहती थी।


 * अभी हाल में ही उन्होंने अपना नया घर बनवाया था। घर में काम चल रहा था और वे नए घर में शिफ्ट हो गए थे।


 * इसी बीच, अचानक एक दिन राधिका की तबीयत बहुत खराब हो गई। घर में सब परेशान हो गए।


 * राधिका को देखने के लिए उसकी दादी भी घर आ गई थीं।


3. रीना की दिनचर्या और बढ़ता तनाव


रीना, राधिका की माँ, पूरा दिन घर का काम करती रहती थी।


 * वह सास की बातें भी सुनती थी और उनकी सेवा भी करती थी।


 * वह पति का हर काम करती थी और समय पर घर के सारे काम निपटाती थी।


 * सुबह-सुबह दोनों बच्चों को स्कूल भेजना, उनका और पति का टिफिन तैयार करना, फिर सास को खाना देना, उनकी सेवा करना, घर में झाड़ू-पोछा, बर्तन, खाना-पानी सब कुछ करने के बाद नहाती, पूजा करती, तब जाकर वह खुद खाना खाती थी।


जब से राधिका की तबीयत बिगड़ी थी, तब से रीना बहुत परेशान और टेंशन में रहने लगी थी।


4. माँ की कठिन तपस्या और अटूट प्रेम


डॉक्टर ने राधिका को टाइफाइड बताया था और राधिका के पेट में भी हमेशा दर्द बना रहता था। डॉक्टर को दिखाने पर भी कोई बीमारी पकड़ में नहीं आ रही थी।


 * राधिका की तबीयत सुधरने की बजाय और बिगड़ती जा रही थी।


 * तभी रीना ने मन्नत मानी कि जब तक राधिका ठीक नहीं हो जाएगी, तब तक वह नदी पर जाकर गीले कपड़ों में जल चढ़ाएगी और वहाँ से आकर मिट्टी मंदिर की लाकर उसके माथे पर लगाएगी।


 * घर से 11 किलोमीटर दूर मंदिर था और मंदिर से लगभग आधा किलोमीटर दूर नदी थी।


 * नदी पर जाकर नहाना, फिर गीले कपड़ों में जल चढ़ाना, फिर वहाँ की मिट्टी 1 किलोमीटर गीले कपड़े पहनकर ही लाना, फिर उसके माथे पर लगाना, और फिर कपड़े बदलना—इतनी कठिन तपस्या एक माँ ही अपने बच्चों के लिए कर सकती थी।


 * रीना को सुबह किसी के भी उठने से पहले 5 बजे उठकर जाना पड़ता था और वह 7:30 बजे तक वापस आ जाती थी।


 * रीना ने लगभग 11 दिन यही फॉलो किया।


ऐसा करने से राधिका की तबीयत में धीरे-धीरे सुधार आने लगा था।


5. दादी की चिंता और गोविंद का विलंब


राधिका की दादी ने कहा, "अब बस करो। तुम अगर बीमार पड़ जाओगी, तो पूरे घर की ज़िम्मेदारी कौन उठाएगा? इसलिए अपना भी थोड़ा ख्याल रखा करो।"


 * रीना ने हाँ में सिर हिला दिया, पर फिर भी रीना को राधिका की बहुत चिंता हो रही थी।


 * इस बीच एक दिन गोविंद रात को 12 बजे घर आ रहे थे।


📌 निष्कर्ष (भाग 3)


रीना ने अपने बच्चे को बचाने के लिए शारीरिक कष्ट की अंतिम सीमा तक जाकर तपस्या की। इस बीच, बच्चों की तबीयत, घर के काम और ससुराल की ज़िम्मेदारियाँ रीना को अंदर से तोड़ रही थीं। अब देखना यह है कि रात 12 बजे घर आते समय गोविंद के साथ रास्ते में क्या घटना घटी।


अगला कदम:


लेबल 


राधिका की

 कहानी, माँ का तप, टाइफाइड, पारिवारिक जिम्मेदारी, गोविंद की देर, नया घर


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