भाग 12: बचपन की यादें: घर की जिम्मेदारियां और छोटी उम्र
राधिका की डायरी भाग 12 गोविंदा का प्रसिद्ध और रीना की वापसी
घर में प्रवेश: रीना का उस चौखट पर फिर से कदम रखना, जहाँ की दीवारें अभी भी उस खौफनाक रात की गवाह थीं। गोविंद का उसे सहारा देकर अंदर ले जाना।
पड़ोसियों की प्रतिक्रिया: सरदार जी और उनके परिवार का रीना को वापस देखकर खुश होना, लेकिन उनकी आँखों में एक सवाल होना। 'मम्मी जी' (110 साल वाली बुजुर्ग) का रीना के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देना।
बच्चों की मुस्कान: राधिका और उसके भाई-बहनों का फिर से खिलखिलाना। रसोई से फिर से छौंक की खुशबू आना, जो घर के जीवित होने का सबूत है।
बदला हुआ गोविंद: क्या गोविंद वाकई बदल गया है? वह रीना के कामों में हाथ बटाने की कोशिश करता है, लेकिन रीना के मन में अभी भी एक डर और सतर्कता बनी हुई है।
रीना की नई शर्त: अब रीना सिर्फ एक पत्नी नहीं है, वह एक माँ है जो अपने अस्तित्व के लिए लड़ना जानती है
📖 भाग 12: माँ की ममता और सीख का मरहम
रीना वापस अपने घर तो आ गई थी, पर उसका मन अभी भी मायके की उन गलियों और माँ की आगोश में अटका था। घर के एक कोने में चुपचाप बैठी रीना उन पलों को याद कर रही थी जब उसने अपनी माँ से पूछा था— "माँ, आपको बिना बताए कैसे पता चल जाता है कि मैं उदास हूँ?"
माँ ने तब बड़े प्यार से रीना के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा था, "बेटा, मैंने तुझे जन्म दिया है, नौ महीने कोख में रखा है। जब तू मेरे पेट में थी, तब भी मैं तेरी धड़कन महसूस करती थी। जब तूने बोलना नहीं सीखा था, तब भी मैं तेरी हरकतों से जान जाती थी कि तुझे कब भूख लगी है, कब प्यास और कब तू तकलीफ में है। मैं माँ हूँ रीना, तू मुझसे अपनी रूह का दर्द नहीं छुपा सकती।"
भाग 12 वाकई में एक माँ के उस आत्मिक ज्ञान (spiritual wisdom) को समर्पित है, जो किसी भी स्कूल या किताब में नहीं सिखाया जाता। माँ ने जो 'धैर्य और संयम' का पाठ रीना को पढ़ाया, वही आज उसके उजड़े हुए संसार को फिर से बसाने की नींव बना।
शायद माँ को पहले ही पता था कि उनकी बेटी को जीवन में किन तूफानों का सामना करना पड़ेगा, इसलिए उन्होंने उसे शब्दों का यह 'कवच' पहले ही थमा दिया था।
Radhika’s Diary: Part 12 (The Victory of Motherhood and the Balm of Wisdom)
A house is rebuilt with bricks, but a home is revived by a mother's soul.
Reena had returned to her house, but her heart was still lingering in the narrow lanes of her maternal home and the warm embrace of her mother. Sitting quietly in a corner, she recalled a conversation from years ago when she had asked, "Ma, how do you always know I’m sad without me saying a word?"
Her mother had stroked her hair and whispered, "I carried you for nine months, Reena. I felt your heartbeat before the world did. When you couldn't speak, I knew your hunger and your pain just by your movements. I am a mother; you can never hide the ache of your soul from me."
Those words became Reena’s strength. Her mother had taught her the greatest essence of life: "Life is never easy, child. The wheel of joy and sorrow turns until our last breath. The one who acts with restraint and patience never truly loses. People often surrender to rage and regret it later. When the path ahead is dark, staying still and remaining calm is the bravest decision you can make." Remembering this, Reena’s heavy heart felt lighter, and she finally drifted into a peaceful sleep.
The Echoes of a New Beginning:
- Crossing the Threshold: As Reena stepped back into the house, the walls still whispered memories of that horrific night. But this time, Govind held her hand, not to drag her, but to support her.
- The Neighbors' Gaze: Sardar Ji and his family watched with a mix of relief and lingering questions. The 110-year-old 'Mummy Ji' placed her trembling hand on Reena’s head, her blessing acting as a silent shield.
- A Living Home: The house breathed again. The aroma of spices from the kitchen and the laughter of Radhika and her siblings were proof that life had returned.
- The Changed Govind: Govind tried to help with chores, clumsily attempting to mend what he had broken. Yet, in Reena’s eyes, there was a newfound vigilance. She was no longer just a submissive wife; she was a mother who knew how to fight for her existence.
राधिका जी, माँ की वह सीख—"जब रास्ता न दिखे तो रुक जाना"—आज रीना के बहुत काम आई। रीना ने झुककर नहीं, बल्कि अपनी गरिमा (dignity) के साथ वापसी की है। लेकिन अब एक बड़ा सवाल खड़ा होता है: क्या गोविंद की यह तौबा वाकई शराब से थी? अक्सर ऐसे मोड़ पर पुराने यार और पुरानी आदतें फिर से दस्तक देती हैं।
अगले भाग (भाग-13) के लिए मेरा सवाल:
क्या घर में शांति आने के बाद गोविंद के वे 'शराबी दोस्त' और वे 'लालची पुलिसवाले' फिर से उसे अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश करेंगे? और क्या रीना अब अपनी माँ की तरह 'सख्त' होकर घर की कमान संभालेगी?
रीना की आँखों से आँसू छलक पड़े थे। माँ ने उसे गले लगाते हुए जो जीवन का सार समझाया था, वह आज रीना के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गया। माँ ने कहा था, "जिंदगी कभी आसान नहीं होती बेटा। मरते दम तक सुख-दुख और संघर्ष का पहिया चलता रहता है। जो इंसान संयम और धैर्य से काम लेता है, वह कभी हारता नहीं। अक्सर लोग गुस्से में घुटने टेक देते हैं और बाद में पछताते हैं कि काश थोड़ा रुक गए होते। जब रास्ता न दिखे, तो रुक जाना और शांत रहना ही सबसे बेहतर फैसला होता है।"
माँ की ये बातें याद करते-करते रीना का भारी मन थोड़ा हल्का हुआ और उसे एक सुकून भरी नींद आ गई।
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