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राधिका की डायरी ​हादसे के बाद: टूटती साँसें, अपनों की आवाज़ और वो खौफनाक मंजर

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  राधिका की डायरी ​ हादसे के बाद: टूटती साँसें, अपनों की आवाज़ और वो खौफनाक मंजर ​उस खौफनाक हादसे के बाद, मैं पूरी तरह से अंदर तक डर चुकी थी। मेरी छाती में धड़कनें इतनी तेज चल रही थीं, मानो कोई अंदर हथौड़ा चला रहा हो। डर का वह कंपन मेरी रग-रग में, शरीर के हर एक हिस्से में साफ़ महसूस हो रहा था; मेरी धमनियों में जैसे खून का नहीं, बल्कि एक भयानक तूफान दौड़ रहा था। ​सड़क पर देखते ही देखते लोगों की एक भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। बिना पूरी बात जाने, लोग उस लड़के (पंडित जी के बेटे) को भला-बुरा कहने लगे और उस पर गुस्सा उतारने लगे। लेकिन मेरी स्थिति ऐसी थी कि मैं न तो पूरी तरह बेहोश हो पा रही थी और न ही पूरे होश में थी। मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, कहाँ जाऊँ। ऐसा लग रहा था मानो मैं अभी भी मौत के उस अंधेरे मुँह में ही बैठी हूँ। वहाँ खड़ी कुछ सहृदय महिलाओं ने आगे बढ़कर मुझे सहारा दिया और पकड़कर उठाया। कुछ पुरुषों ने नीचे गिरी मोटरसाइकिल और मेरे बैग्स को संभाला। लोग मुझे तसल्ली दे रहे थे, तभी भीड़ में से एक लड़का दौड़कर गया और मेरे लिए पानी लेकर आया। पानी के दो घूँट गले से नीच...

राधिका की डायरी ​मौत के पहियों के बीच: जब हौसले ने दी ज़िंदगी को नई उड़ान

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  राधिका की डायरी ​ मौत के पहियों के बीच: जब हौसले ने दी ज़िंदगी को नई उड़ान ​पंडित जी के कॉम्प्लेक्स से विदा लेने का समय आ चुका था। जाने से पहले मैंने पूरी श्रद्धा के साथ पंडित जी के पैर छुए। उन्होंने स्नेहपूर्वक मेरे सिर पर हाथ रखा और आशीर्वाद देते हुए कहा, "खूब तरक्की करो बेटी, तुम्हारा कल्याण हो! तुम समाज में एक बहुत बड़ा बदलाव ला रही हो।" उनका वह आशीर्वाद मेरे भीतर एक नई ऊर्जा भर गया। 50 किलोमीटर दूर मुख्य बस स्टैंड तक का सफर तय करना था और समय तेजी से भागा जा रहा था। मेरी सहूलियत को देखते हुए पंडित जी ने अपने बड़े बेटे को आवाज लगाई और मुझे मोटरसाइकिल से बस स्टैंड तक छोड़ने के लिए कहा। ​मेरे पास दो बैग थे—एक भारी बैग जिसमें मेरे कपड़े और जरूरत का सामान था, उसे मैंने अपनी पीठ पर संभाल लिया, और दूसरा बैग जिसमें मेरा सबसे कीमती औजार यानी मेरा लैपटॉप और बिजनेस की किताबें थीं, उसे आगे सुरक्षित रख दिया गया। मोटरसाइकिल पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए आगे बढ़ रही थी। हवाएँ तेज थीं और मन में बस समय पर पहुँचने की कशमकश। ​अभी हम बस स्टैंड से कुछ ही दूरी पर थे कि अचानक सामने का मं...

राधिका की डायरी ​आख़िरी पड़ाव: समय के साथ दौड़ और नए संकल्प ​शिमला के उस बड़े सेमिनार हॉल से निकलने के बाद,

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  राधिका की डायरी ​ आख़िरी पड़ाव: समय के साथ दौड़ और नए संकल्प ​शिमला के उस बड़े सेमिनार हॉल से निकलने के बाद, मेरी व्यस्तता अभी ख़त्म नहीं हुई थी। मेरा अगला और आख़िरी पड़ाव था—पंडित जी का कॉम्प्लेक्स। वहाँ पहुँचते ही पंडित जी के छोटे भाइयों के साथ एक और छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण मीटिंग तय हुई। यह मीटिंग ठीक वैसी ही थी जैसी अब तक होती आ रही थी—वही जाना-पहचाना प्रोडक्ट प्लान, बिजनेस प्लान, और कामयाबी के '4 Basics'। हालाँकि समय कम था, लेकिन वहाँ बैठे लोगों की उत्सुकता ने उस छोटी सी जगह को भी एक बड़े मंच में बदल दिया था। ​घड़ी की सुइयाँ लगातार टिक-टिक कर रही थीं। मुझे हर हाल में वहाँ से शाम 5:00 बजे निकलना था, क्योंकि मुझे आगे 50 किलोमीटर का सफर तय करके रात 8:00 बजे की मुख्य बस पकड़नी थी। घर लौटने की जल्दी और बिजनेस को सही अंजाम तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी के बीच एक अजीब सी दौड़ चल रही थी। मीटिंग समाप्त करते ही, मैंने कुछ ज़रूरी ब्रोशर पंडित जी के हाथों में थमाए और अपना विजिटिंग कार्ड उन्हें देते हुए कहा, "यह सिर्फ एक कार्ड नहीं, हमारे साथ की शुरुआत है।" अपने बैग को संभ...

राधिका की डायरी ​मंच से परे: श्रोताओं से लीडर्स बनने तक का सफर

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  राधिका की डायरी ​ मंच से परे: श्रोताओं से लीडर्स बनने तक का सफर ​जैसे ही मेरे आखिरी शब्दों की गूँज सेमिनार हॉल में शांत हुई, मैं सामने बैठे लोगों के चेहरों पर एक साफ़ बदलाव देख सकती थी। "शुरुआत कैसे करें" की उलझन अब पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और उसकी जगह '4 Basics' की साफ़ समझ ने ले ली थी। 'ना' को एक अवसर में बदलने और अपनी डाउनलाइन को एक बच्चे की तरह संभालने वाले फॉर्मूले ने हर एक व्यक्ति के दिल को छू लिया था। ​जब मैं मंच से नीचे उतरी, तो तालियों की गड़गड़ाहट सिर्फ औपचारिकता नहीं थी; वह लोगों के अंदर जागे नए आत्मविश्वास की दहाड़ थी। डिस्ट्रीब्यूटर्स की एक बड़ी भीड़ ने तुरंत मुझे घेर लिया, उनकी आँखों में बड़े सपने थे और उनके हाथों में नोट्स से भरी डायरियाँ थीं। ​तीसरी रो से बहुत ध्यान से सुन रहे एक बुजुर्ग सज्जन भावुक आँखों के साथ मेरे पास आए। उन्होंने कहा, "राधिका जी, मैं एक साल से इस इंडस्ट्री में हूँ, लेकिन आज मुझे समझ आया कि मेरी टीम क्यों नहीं बढ़ रही थी। मैं सिर्फ लोगों को जोड़ रहा था, लेकिन मैं कभी वो ज़िम्मेदार 'अपलाइन' नहीं बन पाया जिसकी...

राधिका की डायरी ​कामयाबी के चार स्तंभ (4 Basics): एक डिस्ट्रीब्यूटर से लीडर बनने तक का सफर

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  राधिका की डायरी ​ कामयाबी के चार स्तंभ (4 Basics): एक डिस्ट्रीब्यूटर से लीडर बनने तक का सफर अब हम बात करेंगे फॉर बेसिक पर  अभी तक हमने समझा कि काम क्या करनाहै और उसमें क्या मिलेगा  अब हम समझेंगे कि इसकासिस्टम क्या है  हमने जॉइनिंग तो कर ली और यह भी जान लीजिए कि हमको क्या मिलेगा लेकिन अब क्या करें  1 पहला ऑप्शन है अभी आपके पास की आपके रिश्तेदारी में से आपके आसपास के लोगों में ऐसे जाने वाले भाषण और आपके स्ट्रेंज में से जितने भी लोग आपके आसपास हैं सब्जी वाला दूध वाला डॉक्टर सारे लोगों की एक लिस्ट बनाना है लिस्ट कितनी बड़ी होगी कामयाबी इतनी बड़ी होगी  2 दूसरा जो भी हमारी लिस्ट बनी हुई है उनके पास एक के बाद एक उनसे मिलने जाना है जैसा हमने आज प्लान देखा बिजनेस को समझा प्रोडक्ट को समझा वैसा ही उनको समझाना है जरूरी नहीं है कि 10 लोगों को समझाया 10 लोग आ जाएंगे नहीं नेगेटिव नहीं होना 10 में से हो सकता है पांच लोग आए हो सकता है चार लोग हो सकता है एक ही आई उसने अपने को टेंशन नहीं लेनी है no यानी नेक्स्ट लोग ना सुन के टूट जाते हो गया बात खत्म अब नहीं होगा हमारा वजन ख...

राधिका की डायरी टीम वर्क की शक्ति: शून्य निवेश से शिखर तक का सफर

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राधिका की डायरी टीम वर्क की शक्ति: शून्य निवेश से शिखर तक का सफर Ab samajhte hain team work हमारी टीम जितनी बड़ी होगी उतना बड़ा ज्यादा इनकम और इतनी ही बड़ी सक्सेस  स्टेप बाय स्टेप समझते हैं जब तक कोई खरीदी करता रहता है तब तक वह एक कस्टमर ही रहता है और जब वह जॉइन करता है तो वह बन जाता है  डिस्ट्रीब्यूटर और डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए कोई पैसा नहीं लगता अपना आधार कार्ड पैन कार्ड पासबुक लेकर नॉमिनी का नाम डालकर मोबाइल नंबर डालकर हम रजिस्ट्रेशन करते हैं जिसका कोई पैसा नहीं लगता और हमें डिस्ट्रीब्यूटर बनने का मौका मिल जाता है lekin ham डिस्काउंट रेट पर प्रोडक्ट खरीदने के लायक तब होते हैं जब हमारी आईडी पर 5000 की खरीदी हो गई हो  एक आईडी 5000 में ग्रीन हो जाती है एक्टिव हो जाती है।  और उसे आईडी से हम दो आईडी और बना सकते हैं वह भी अपने ही नाम की उसके नीचे हमारी टीम चलती जाती है जिसकी इनकम हमें तीनों आईडी पर मिलती रहती है आप जैसे मन को के बाद उसे ईद के बाद हमारे पास तो लोग आ गएज्वाइन करने एक बंदे को हमने  O R G  1 में ज्वाइन कराया और एक को हमने O R G 2 में ज्वाइन करा...

राधिका की डायरी शीर्षक: जोड़ों के दर्द और हड्डियों की कमजोरी का काल: घर पर बना 'जादुई पोषक पाउडर'

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  राधिका की डायरी शीर्षक: जोड़ों के दर्द और हड्डियों की कमजोरी का काल: घर पर बना 'जादुई पोषक पाउडर' ​आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और गलत खान-पान का सबसे पहला असर हमारे जोड़ों और हड्डियों पर पड़ता है। घुटनों का दर्द, जकड़न और कमजोरी अब सिर्फ बुढ़ापे की नहीं, बल्कि हर उम्र की समस्या बन गई है। ​'राधिका की डायरी' में आज मैं आपके साथ एक ऐसा प्राकृतिक मिश्रण (Health Powder) साझा कर रही हूँ, जो न केवल जोड़ों के दर्द को दूर करेगा, बल्कि आपको अंदरूनी मजबूती भी देगा। ​ जरूरी सामग्री (मात्रा के साथ): ​ हड्डियों की मजबूती के लिए: मखाना (250g), भुने काले चने (250g), सफेद तिल (250g), खसखस (50g)। ​ चिकनाई और सूजन के लिए: अलसी (100g), बादाम (150g), अखरोट (वैकल्पिक)। ​ दर्द निवारक मसाले: सोंठ पाउडर (100g), दालचीनी (50g)। ​ पेट की ठंडक और फ्लेवर के लिए: सौंफ (250g), इलायची (4-6 दाने)। ​ प्राकृतिक मिठास: खारक/छुआरा (100-150g)। ​ यह कैसे काम करता है? ​ कैल्शियम का पावरहाउस: मखाना और तिल हड्डियों के घनत्व को बढ़ाते हैं। ​ प्राकृतिक लुब्रिकेशन: अलसी और बादाम जोड़ों के बीच की...

राधिका की डायरी समय का गुणन और स्टार सिल्वर का जादू: अमीर बनने का गुप्त सूत्र

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  राधिका की डायरी  समय का गुणन और स्टार सिल्वर का जादू: अमीर बनने का गुप्त सूत्र डुप्लीकेशन का तरीका  जैसे की मां के चलो कि हम अकेले हैं एक इंसान है एक इंसान के पास काम करने के लिए सिर्फ 24 घंटे ही मिले हुए हैं कोई इंसान कितना बचा है लेकिन 1 दिन में हम 24 घंटे काम कर सकते हैं लाख चाहने पर भी हम 24 घंटे काम नहीं कर सकते वहां 24 घंटे अगर काम कर भी ले तो 1 दिन 2 दिन से ज्यादा नहीं कर सकते खाने का मतलब यह है कि 10 से 12 घंटे एक इंसान काम करता है से ज्यादा वह नहीं कर सकता और अगर हमारा टारगेट हम रखें कि हमें 1 दिन में 100 घंटे काम करना है तो ऐसा पॉसिबल तब हो पाएगा जब हमारे पास 10 लोग काम करने के लिए हैं मार्केट में अगर हम 10 लोगों से  काम करने की काम करने  के लिए रखते हैं तो हमें उनकी तनख्वाह देनी पड़ती है उन्हें पैसा देना पड़ता है  लेकिन अगर हम नेटवर्क मार्केटिंग की बात करें तो 10 लोगों के काम करने का पैसा हमको नहीं देना पड़ता वह 10 लोग हमारे लिए यानी खुद के लिए काम करते हैं लेकिन इनडायरेक्ट को कम हमारे लिए भी काम होता है और जिसका पैसा हमको नहीं देना पड़ता उनका ...

राधिका की डायरी ​स्मार्ट वर्क की शक्ति: एक ही मेहनत से तीन गुना कमाई का राज़

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  राधिका की डायरी ​ स्मार्ट वर्क की शक्ति: एक ही मेहनत से तीन गुना कमाई का राज़ एक आईडी लगाने से एक  एक ही जगह पैसा आता है तीन आईडी लगाने से एक ही जगह काम करने की तीन जगह पैसेआते हैं समझते हैं कैसे पहले आईडी लगी हमारी उसके नीचे लेफ्ट में एक आईडी हमारी राइट में एक आईडी हमारी  उसके बाद जो भी आईडी लगेंगी लिफ्ट वाली आईडी की राइट ओर लेफ्ट में लगेगी फिर राइट वाली आईडी की लेफ्ट और राइट मिलेगी और उन्हें दोनों लेफ्ट और राइट की आईडी में से राइट वाली आईडी में पैसा जनरेट होगा और और लेफ्ट वाली आईडी के नीचे का लेफ्ट और राइट की आईडी का मैचिंग होने से लेफ्ट वाली आईडी के लिए  पैसा जनरेट होगा और लेफ्ट और राइट में जितना पैसा जमा होगा उसका मैचिंग के हिसाब से हमारी में ईद पर पैसा जनरेट होगा यानी कि एक ही जगह काम करने का तीन जगह पैसा जनरेट होगा आप समझते हैं कि जहां और कंपनियां 35% 40% देती है माय लाइफस्टाइल ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड 70% बिजनेस वॉल्यूम देती है बिजनेस वॉल्यूम बोले तो सो रुपए का 75% सो रुपए का हमने सामान खरीद सो रुपए का हमको सामान मिल गया और उसका 75% हमारे आईडी पर चढ़ जाता है ...

राधिका की डायरी ​"लाइफ चेंजिंग अपॉर्चुनिटी: जब सेहत और संपत्ति का संगम हुआ"

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  राधिका की डायरी ​ सपनों की नई उड़ान: एक मीटिंग जिसने सोचने का नज़रिया बदल दिया 300 कि इधर आने के बाद मीटिंगशुरू हुई  राधिका ने शुरुआत में ही सभी को यह बोल दिया जो लास्ट तक मीटिंग में बैठेंगे वही लोग यहां पर बैठे वरना आप लोग apna Kam dekh sakte hain इसके अलावा जो भी मैं जानकारी यहां देने वाली है वह एक लाइफ चेंजिंग अपॉर्चुनिटी है यह आपके मोबाइल या आपका ध्यान कहीं और गया और एक स्टेप भी आपसे छूट गया तो हो सकता है  आप बहुत कुछ मिस कर दे इसीलिए मैं सभी से निवेदन करती हूं कि आप सभी अपना मोबाइल साइलेंट पर कर ले   राधिका ने बोलना स्टार्ट किया जैसे कि हम सभी जानते हैं कि आजकल की बात बहुत भारी लाइफ में हम अपने आप का ध्यान कभी नहीं दे पाते और बीमारियों के साथ साथ हमारे खानपान में कोई सुधार नहीं है  हमारा काम दो सेक्टर पर है पहला हेल्थ और दूसरा है पैसा हेल्थ सही है तो पैसा कभी भी कमाया जा सकता है हेल्थ सही नहीं है तो पैसा कभी किसी काम नहीं आएगा बीमारी के ऊपर काम नहींहै अपना  काम है स्वस्थ व्यक्ति के ऊपर स्वस्थ व्यक्ति को स्वस्थ रहते हुए 100 साल कैसे जिंदगी हम जी स...

राधिका की डायरी ​"बीमारी का इंतज़ार या सेहत का आधार? आज के युग का सबसे बड़ा सवाल"

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  राधिका की डायरी ​ "बीमारी का इंतज़ार या सेहत का आधार? आज के युग का सबसे बड़ा सवाल" ​सुबह होते ही हम अपने अगले पड़ाव पर पहुँच गए थे। थकान तो थी, पर मीटिंग का उत्साह उससे कहीं बड़ा था। लेकिन जब लोगों से आमना-सामना हुआ, तो एक अलग ही चुनौती खड़ी थी। कुछ लोग वाकई कुछ नया करना चाहते थे, लेकिन कुछ इतने 'नेगेटिव' थे कि वे दूसरों के उत्साह पर भी पानी फेरने में लगे थे। ​मेरी लड़ाई आज सिर्फ बिजनेस की नहीं थी, बल्कि एक सोच की थी। मैं उन्हें बार-बार एक ही बात समझा रही थी— "इलाज से बेहतर बचाव है" (Prevention is better than cure)। मैंने उनसे कहा, "आज के युग में आप जिसे 'शुद्ध' कह रहे हैं, क्या वह वाकई शुद्ध है? हवा से लेकर पानी तक और खेत से आने वाली सब्जी तक, हर चीज़ रसायनों के बोझ तले दबी है। अगर हम आज स्वस्थ महसूस कर रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि अंदर सब ठीक है। यह सिर्फ एक छलावा है।" ​लोग डॉक्टरों को लाखों रुपए देने में नहीं हिचकिचाते, लेकिन जब हम उनसे कहते हैं कि वह पोषण (Nutrition) लें जो उन्हें भोजन से नहीं मिल रहा, तो उनका सीधा जवाब होता है— ...

राधिका की डायरी ​"रात का सफर और संकल्पों की उड़ान: ३०० किलोमीटर का नया इम्तिहान"

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राधिका की डायरी ​ "रात का सफर और संकल्पों की उड़ान: ३०० किलोमीटर का नया इम्तिहान" ​पंडित जी का साथ मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं था। जहाँ सफर दुर्घटनाओं और अनिश्चितताओं से भरा हो, वहाँ अगर कोई हाथ थामने वाला मिल जाए, तो रास्ता आसान लगने लगता है। दिन भर बैक-टू-बैक तीन मीटिंग्स करने के बाद शरीर टूट रहा था, लेकिन मन में एक अजीब सा उत्साह था। पंडित जी न केवल मेरा मार्गदर्शन कर रहे थे, बल्कि एक सुरक्षा कवच की तरह मेरे साथ थे। ​शाम को उनके किसी परिचित के यहाँ हमने तसल्ली से भोजन किया। वह आत्मीयता और खाने का स्वाद मेरी सारी थकान हर ले गया। लेकिन आराम के लिए अभी वक्त नहीं था। रात के ठीक 10 बजे हम बस में सवार हुए। सामने 300 किलोमीटर का लंबा सफर था और सुबह होते ही फिर से वही भागदौड़—अगले दिन का शेड्यूल 3 से 4 मीटिंग्स से भरा हुआ था। ​बस की खिड़की से बाहर अंधेरे को चीरती सड़कों को देखते हुए मैंने सोचा, "यह संघर्ष सिर्फ मेरा नहीं है, यह उन सपनों का है जिन्हें मैं हकीकत में बदलना चाहती हूँ।" पंडित जी की मौजूदगी ने मुझे यह हौसला दिया कि जब इरादे नेक हों, तो ईश्वर भी किसी न किसी...

राधिका की डायरी: विश्वास का हमसफ़र और भविष्य की नींव

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  राधिका की डायरी: शुद्धता और वैज्ञानिक प्रमाणिकता का आधार ​मेरी कहानियों में जिन आयुर्वेदिक समाधानों का ज़िक्र होता है, वे केवल अनुभव पर नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर भी खरे उतरे हैं. 'जीवन ज्योति आयुर्वेदा' के माध्यम से मैं जो उत्पाद साझा करती हूँ, उनके पीछे भारत के दिग्गज वैज्ञानिकों की एक पूरी टीम का मार्गदर्शन शामिल है. ​हमारे विशेषज्ञों की टीम (Our Expert Panel) ​इन उत्पादों के निर्माण में उन वैज्ञानिकों का अनुभव समाहित है जिन्होंने दशकों तक भारत की बड़ी फार्मा कंपनियों का नेतृत्व किया है: ​ डॉ. डी.बी.ए. नारायणन (Ayurveda Scientist):  इन्हें आयुर्वेद और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में  42 वर्षों  का विशाल अनुभव है. ये 'Eminent Pharmacist Award 2007' से सम्मानित हैं और इन्होंने भारत सरकार के 'आयुष' (AYUSH) बोर्ड में भी अपनी सेवाएँ दी हैं. ​ डॉ. के.सी. गौडन (Scientist):  इनके पास  37 वर्षों  का अनुभव है और इन्होंने डाबर (Dabur) व हिमालय (Himalaya) जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में रिसर्च डायरेक्टर के रूप में कार्य किया है. ​ डॉ. एस.के. शर्मा (FSSAI Ad...

राधिका की डायरी: आत्मनिर्भरता की सीख और गुप्त समाधान

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  राधिका की डायरी: शुद्धता और वैज्ञानिक प्रमाणिकता का आधार ​मेरी कहानियों में जिन आयुर्वेदिक समाधानों का ज़िक्र होता है, वे केवल अनुभव पर नहीं, बल्कि आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर भी खरे उतरे हैं. 'जीवन ज्योति आयुर्वेदा' के माध्यम से मैं जो उत्पाद साझा करती हूँ, उनके पीछे भारत के दिग्गज वैज्ञानिकों की एक पूरी टीम का मार्गदर्शन शामिल है. ​हमारे विशेषज्ञों की टीम (Our Expert Panel) ​इन उत्पादों के निर्माण में उन वैज्ञानिकों का अनुभव समाहित है जिन्होंने दशकों तक भारत की बड़ी फार्मा कंपनियों का नेतृत्व किया है: ​ डॉ. डी.बी.ए. नारायणन (Ayurveda Scientist):  इन्हें आयुर्वेद और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में  42 वर्षों  का विशाल अनुभव है. ये 'Eminent Pharmacist Award 2007' से सम्मानित हैं और इन्होंने भारत सरकार के 'आयुष' (AYUSH) बोर्ड में भी अपनी सेवाएँ दी हैं. ​ डॉ. के.सी. गौडन (Scientist):  इनके पास  37 वर्षों  का अनुभव है और इन्होंने डाबर (Dabur) व हिमालय (Himalaya) जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में रिसर्च डायरेक्टर के रूप में कार्य किया है. ​ डॉ. एस.के. शर्मा (FSSAI Ad...