राधिका की डायरी ममता का संतोष और बेटे की उड़ान / THE MOTHER'S JOY AND THE SON'S FLIGHT
राधिका की डायरी ममता का संतोष और बेटे की उड़ान / THE MOTHER'S JOY AND THE SON'S FLIGHT जब बेटे ने पेटी खोलकर देखा, तो उसमें ₹20,000 के नोट चमक रहे थे। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने तुरंत पैसे निकाले और उन्हें अपनी उंगलियों पर गिनना शुरू कर दिया। नोटों को गिनते हुए बेटे के चेहरे पर एक ऐसी खुशी थी जो राधिका ने बहुत समय से नहीं देखी थी। बेटा पैसे गिनते हुए उत्साह से बोला, "मम्मी, इतने पैसे मैंने इस गाँव में एक साथ कभी नहीं देखे!" बेटे के मुंह से यह बात सुनकर राधिका की आँखों में आँसू छलक आए। वे आँसू दुख के नहीं, बल्कि एक माँ के संतोष के थे। अपने गहने खोने का दर्द उस वक्त बिल्कुल गायब हो गया जब उसने देखा कि उसका बेटा उन पैसों को गिनकर कितना खुश हो रहा था। पैसे गिनने के बाद बेटे ने उन्हें वापस संभालकर रख दिया और बोला, "सुबह इसमें से ₹15,000 लेकर जाऊंगा।" राधिका ने मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है बेटा।" अगली सुबह बेटा उठा और हमेशा की तरह पहले अपनी कंप्यूटर क्लास गया। दोपहर एक बजे जब वह क्लास से लौटा, तो उसने जल्दी-जल्दी खाना खाया और तुरंत अपनी ...