राधिका की डायरी ​Part 427: The Sacrifice of Pride and Taste

 


राधिका की डायरी

Part 428: The Sacrifice of Pride and Taste

​The hunger of the stomach and the pressure of debt finally broke Radhika’s lifelong habits. To pay off the immediate installments of her loans, she had to bow down and borrow money from her sister. But the biggest blow was to her self-respect and her love for good food. Radhika, who never ate anything less than the finest Basmati rice and was famous for her culinary skills, reached a point of absolute desperation. She brought home the 'Kanki' (broken, dust-like rice particles) usually discarded or used as fodder. How she would swallow that tasteless, gritty meal was a question only God could answer. The woman who loved to cook and eat the best was now forced to survive on scraps, just to keep her breath going for her son’s sake.

भाग 428: स्वाद का त्याग और स्वाभिमान की परीक्षा

​पेट की भूख और कर्ज के दबाव ने आखिरकार राधिका की बरसों की आदतों को तोड़ दिया। कर्ज की किस्तें पटाने के लिए उसे अपनी बहन के आगे हाथ फैलाना पड़ा और उनसे उधार लेना पड़ा। लेकिन सबसे बड़ी चोट उसके स्वाभिमान और खान-पान के शौक पर लगी। राधिका, जो बासमती चावल से कम कुछ नहीं खाती थी और जिसे बेहतरीन खाना बनाने और खाने का शौक था, आज विवशता के उस शिखर पर थी जहाँ उसे चावल के टुकड़े (कनकी/खंड) घर लाने पड़े। वह बारीक खंड, जिसे कभी वह देखना भी पसंद न करती, आज उसकी रसोई का हिस्सा था। वह इसे गले से कैसे उतारेगी, यह तो सिर्फ ऊपर वाला ही जानता था। एक माँ अपने बेटे के भविष्य और अपनी प्रतिज्ञा को टूटने से बचाने के लिए किस हद तक समझौता कर सकती है, यह उसका जीता-जागता उदाहरण था।

निष्कर्ष: जब लक्ष्य बहुत बड़ा हो, तो थाली का स्वाद और मन का शौक गौण हो जाता है। राधिका आज अपने वजूद को गलाकर अपने कल को सींच रही थी।

आज का बिजनेस मंत्र (Step-5):

अटूट संकल्प (Unshakable Will): बिजनेस में ऐसे दिन भी आएंगे जब आपके पास बुनियादी सुख-सुविधाएं भी नहीं होंगी। राधिका ने सिखाया कि सफल वही होता है जो मुश्किल समय में अपनी शान और शौकत को किनारे रखकर सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करता है। गिरकर संभलना ही लीडरशिप है।

आज की प्रोडक्ट जानकारी:

​डेली डिटॉक्स  (डेली डिटॉक्स): जब हम मजबूरी में खराब या कम गुणवत्ता वाला खाना (जैसे कनकी या बिना पोषण वाला भोजन) खाते हैं, तो शरीर में गंदगी और टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। ' डेली डिटॉक्स ' शरीर की अंदरूनी सफाई करता है और खराब खान-पान के दुष्प्रभावों को दूर कर आपको अंदर से शुद्ध रखता है।

आज का विशेष सवाल: दोस्तों, क्या आपने कभी अपनी किसी बड़ी जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए अपनी सबसे पसंदीदा चीज का त्याग किया है? क्या राधिका का यह समझौता उसे एक दिन बड़ी कामयाबी दिलाएगा? अपनी संवेदनाएं और विचार कमेंट में जरूर लिखें।

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