राधिका की डायरी Part 374: A Mother’s Wisdom and the Silent Departure

 

राधिका की डायरी

Part 374: A Mother’s Wisdom and the Silent Departure

There was no question of Radhika going to her in-laws' house, as she was despised there. After the emotional reunion at the school, she quietly handed her son ₹200 and whispered, "Keep this hidden and use it only when you truly need it." She knew the news of her visit would eventually reach the household since the villagers and teachers had seen her. "If they ask, tell the truth," she advised him firmly. "Don't lie to cover one thing, because one lie leads to many more. If they say something bitter, just stay silent or walk away. Silence is the best response when dealing with elders."

With a heavy yet relieved heart, she looked at her grown-up son one last time. "Take care of yourself. If you ever feel like talking, call me from anyone’s phone. And if there is any trouble, let me know immediately," she said, her voice trembling with emotion. Having secured her daughter in the hospital and blessed her son at his school, Radhika turned away. She didn't look back, heading straight for the bus stand to return to her life of struggle in the forest, carrying with her the bittersweet memories of these few days.

भाग 374: माँ की सीख और खामोश विदाई

राधिका के लिए ससुराल की दहलीज लांघना नामुमकिन था, क्योंकि वहाँ उसे कोई पसंद नहीं करता था। स्कूल में बेटे से मिलने के बाद, उसने बड़ी सावधानी से उसे ₹200 दिए और कान में कहा, "इसे छुपाकर रखना और अपनी जरूरत पर ही खर्च करना।" वह जानती थी कि उसके आने की खबर घर तक पहुँच ही जाएगी, क्योंकि गाँव वालों और स्कूल की मैडम ने उसे देख लिया था। उसने बेटे को समझाया, "अगर कोई पूछे तो सच बोल देना। एक बात छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं। और अगर कोई बुरा-भला कहे, तो चुप रहना या वहाँ से दूर चले जाना। बड़ों को पलटकर जवाब न देना ही सबसे अच्छा है।"

भारी मन लेकिन संतुष्ट आत्मा के साथ उसने अपने बेटे को आखिरी बार देखा। "अपना ख्याल रखना, जब भी मन करे किसी के भी फोन से मुझे कॉल करना। कोई तकलीफ हो तो मुझे खबर जरूर करना," इतना कहकर राधिका वहां से निकल पड़ी। उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और सीधे बस स्टैंड की ओर बढ़ गई। अपनी बेटी को मौत के मुँह से बाहर देखकर और बेटे को समझदार होते देख, राधिका अब वापस उस कठिन ड्यूटी और जंगल के एकांत की ओर लौट रही थी, जहाँ केवल उसकी मेहनत और उसकी साधना ही उसकी साथी थी।

निष्कर्ष: राधिका ने अपने दोनों बच्चों के प्रति अपना फर्ज निभाया। वह खाली हाथ घर से निकली थी, लेकिन अब उसके पास संतोष की दौलत थी। अब उसे फिर से उस कोसा और जंगल की दुनिया में खुद को झोंकना था।

मजबूत सवाल: क्या राधिका के इस गुप्त दौरे के बाद उसके ससुराल वाले उसके बेटे को परेशान करेंगे? और क्या राधिका की यह चुप्पी और धैर्य उसके दुश्मनों को हराने में कामयाब होगा?

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