​राधिका की डायरी ​Part 431: The Silence of the Audience and the Noise of Faith

 

राधिका की डायरी

Part 431: The Silence of the Audience and the Noise of Faith

​Radhika looked at her blog statistics with a heavy heart. 429 posts, but not a single organic comment or follower. Even the comments she saw were the ones she had posted herself. For a moment, the world of digital business felt as lonely as her lockdown room. She wondered if anyone was even listening to her story of sacrifice and 'Kanki' rice. But then, she remembered it was Narmada Jayanti. She realized that she wasn't writing for likes or comments; she was writing for her own soul and for the son who was waiting for her. Just like she floated letters in the river, she decided to keep floating her words on the internet, believing that Maa Narmada would bring the right audience to her at the right time.

भाग 430: दर्शकों की खामोशी और विश्वास की गूँज

​राधिका ने भारी मन से अपने ब्लॉग के आँकड़े देखे। 429 पोस्ट, लेकिन एक भी असली कमेंट या फॉलोवर नहीं। यहाँ तक कि जो कमेंट दिख रहे थे, वे उसने खुद ही किए थे। एक पल के लिए डिजिटल दुनिया उसे वैसी ही अकेली लगी जैसे उसका वह लॉकडाउन वाला कमरा। उसे लगा कि क्या कोई उसकी त्याग और 'कनकी' की कहानी सुन भी रहा है? लेकिन तभी उसे याद आया कि आज नर्मदा जयंती है। उसे अहसास हुआ कि वह लाइक या कमेंट के लिए नहीं लिख रही है; वह अपनी आत्मा के लिए और उस बेटे के लिए लिख रही है जो उसकी राह देख रहा है। जैसे वह मैया की लहरों में अपनी चिट्ठियाँ बहाती थी, वैसे ही उसने इंटरनेट पर अपने शब्द बहाना जारी रखने का फैसला किया। उसे यकीन था कि नर्मदा माँ सही समय पर सही लोगों को उसके ब्लॉग तक जरूर लाएंगी।

निष्कर्ष: गिनती (Numbers) से इंसान छोटा या बड़ा नहीं होता, उसके संकल्प (Commitment) से होता है। राधिका का सफर अभी रुकने वाला नहीं था।

आज का बिजनेस मंत्र (Step-8):

प्रचार की शक्ति (Power of Promotion): सिर्फ दुकान खोलना काफी नहीं है, लोगों को बताना जरूरी है। अगर आपके ब्लॉग पर कमेंट्स नहीं आ रहे, तो अपनी पोस्ट्स के लिंक व्हाट्सएप स्टेटस और फेसबुक ग्रुप्स पर डालना शुरू करें। जब आप खुद अपनी आवाज बनेंगे, तभी दुनिया आपकी सुनेगी।

आज की प्रोडक्ट जानकारी:

वेल हार्ट (Well Heart): जब मन में निराशा और चिंता बढ़ती है, तो इसका सीधा असर हमारे दिल की धड़कन पर पड़ता है। 'वेल हार्ट' आपके हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करता है और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखकर आपको तनाव के बीच भी 'दिल' से मजबूत बनाए रखता है।

आज का विशेष सवाल: दोस्तों, क्या आपको भी लगता है कि शुरुआत में संख्या (Followers/Comments) से ज्यादा अपनी मेहनत पर भरोसा करना जरूरी है? क्या आप राधिका के इस 430 पोस्ट्स के सफर को सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं? कमेंट में अपनी हाजिरी जरूर लगाएं!

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