राधिका की डायरी ​Part 417: The Silence Before the Storm of Freedom

 


राधिका की डायरी

Part 418: The Silence Before the Storm of Freedom

​Radhika spent her nights in that small room, staring at her son's face on the video call. The lockdown was a curse for the world, but for Radhika, it was a time of deep strategy. She had the money now, she had the knowledge of Ayurveda, and she had the support of people like Saheb who had seen her miracle. She started talking to her brother and some trusted contacts on the phone about how to legally and safely bring her son back once the restrictions eased. Every penny she earned was a step closer to his freedom. She was no longer the helpless woman who left her home six years ago; she was a warrior preparing for her final battle.

भाग 418: आजादी के तूफान से पहले की शांति

​लॉकडाउन की रातें राधिका उस छोटे से कमरे में अपने बेटे का चेहरा वीडियो कॉल पर देखते हुए बिताती थी। दुनिया के लिए यह कैद एक अभिशाप थी, लेकिन राधिका के लिए यह गहरी रणनीति बनाने का समय था। अब उसके पास पैसा था, आयुर्वेद का अथाह ज्ञान था, और साहब जैसे लोगों का समर्थन था जिन्होंने उसकी शक्ति का चमत्कार देखा था। उसने फोन पर अपने भाई और कुछ भरोसेमंद लोगों से बात करना शुरू किया कि जैसे ही पाबंदियां ढीली होंगी, वह कैसे कानूनी और सुरक्षित तरीके से अपने बेटे को वापस लाएगी। उसकी कमाई का एक-एक पैसा उसे बेटे की आजादी के करीब ले जा रहा था। वह अब वो बेबस औरत नहीं थी जो छह साल पहले घर से निकली थी; वह एक योद्धा थी जो अपनी आखिरी लड़ाई की तैयारी कर रही थी।

निष्कर्ष: माँ की ममता जब संकल्प बन जाती है, तो वह दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बन जाती है।

आज का विशेष सवाल: क्या आपको भी लगता है कि एक माँ अपने बच्चे के लिए दुनिया की किसी भी ताकत से लड़ सकती है? क्या आपने कभी किसी माँ को अपनी संतान के लिए असंभव को संभव करते देखा है? कमेंट में अपनी राय और अनुभव जरूर लिखें।

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