राधिका की डायरी ​Part 430: The Divine Shelter of Mother Narmada

 


राधिका की डायरी

Part 430: The Divine Shelter of Mother Narmada

​Today was Narmada Jayanti, a day that held a very special place in Radhika's heart. After her mother’s demise, she had accepted Mother Narmada as her own mother. For years, she followed a strict ritual—she would keep a fast and wouldn't touch a grain of food until she offered a 'Chunari' to the holy river. Narmada was her ultimate confidante. Whenever she was drowned in tension or debt, she would pour her heart out on pieces of paper and float those letters in the river, believing that Maa Narmada would definitely find a solution to her problems. Even in this lockdown, with an empty stomach and heavy debts, the arrival of Narmada Jayanti brought a divine glow to her face. She felt that her Mother was listening, and soon, the tide of her life would change.

भाग 429: नर्मदा मैया की दैवीय शरण

​आज नर्मदा जयंती थी, एक ऐसा दिन जो राधिका के दिल के सबसे करीब था। अपनी माँ के देहांत के बाद उसने नर्मदा मैया को ही अपनी माँ मान लिया था। सालों से उसका एक अटूट नियम था—वह व्रत रखती थी और जब तक मैया को चुनरी न चढ़ा दे, अन्न का दाना ग्रहण नहीं करती थी। नर्मदा जी राधिका के लिए सिर्फ एक नदी नहीं, उसकी सबसे बड़ी राजदार थीं। जब भी वह कर्ज, तनाव या परेशानियों से घिरती, तो वह कागज पर अपनी सारी पीड़ा लिखती और उन चिट्ठियों को मैया की लहरों में बहा देती। उसे पूरा विश्वास था कि उसकी हर चिट्ठी का जवाब नर्मदा माँ जरूर देंगी। आज लॉकडाउन और कंगाली के बीच भी, नर्मदा जयंती ने राधिका के चेहरे पर एक अलग ही चमक बिखेर दी थी। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी 'माँ' उसकी पुकार सुन रही है और जल्द ही दुखों का यह सन्नाटा खत्म होगा।

निष्कर्ष: जहाँ विज्ञान और तर्क खत्म होते हैं, वहां से आस्था का रास्ता शुरू होता है। राधिका की ये चिट्ठियाँ मैया तक पहुँच चुकी थीं।

आज का बिजनेस मंत्र (Step-7):

आस्था और विश्वास (Belief & Faith): बिजनेस में केवल गणित काम नहीं आता, कई बार आपका खुद पर और उस परम शक्ति पर विश्वास ही आपको डूबने से बचाता है। जब हालात आपके हाथ में न हों, तो अपनी मेहनत मैया को सौंप दें और विश्वास रखें कि सही समय पर सही रास्ता जरूर खुलेगा।

आज की प्रोडक्ट जानकारी:

आयुषवाश (Ayush waash): माँ नर्मदा के जल की तरह ही यह काढ़ा भी शरीर के लिए अमृत समान है। दालचीनी, तुलसी, कृष्णा मिर्च और शुंठी से बना यह मिश्रण आपके फेफड़ों को साफ रखता है और मौसमी बीमारियों से लड़ने की अजेय शक्ति देता है।

आज का विशेष सवाल: साथियों, क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसी जगह या शक्ति है जहाँ आप अपना सारा दुख हल्का कर देते हैं? क्या आपको भी लगता है कि जब हम अपनी परेशानियाँ 'ऊपर वाले' को सौंप देते हैं, तो मन हल्का हो जाता है? कमेंट में नर्मदा मैया की जय जरूर लिखें।

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