राधिका की डायरी ​Part 421: The Wall of Jealousy and the Power of Knowledge

 


राधिका की डायरी

Part 422: The Wall of Jealousy and the Power of Knowledge

​Radhika learned a bitter truth during the lockdown: people would rather risk their lives in hospitals than see someone they know succeed. Even when they were suffering, they made excuses to avoid buying her products. In their minds, it wasn't about health; it was about jealousy. They feared that if they bought a product from Radhika, she might become a millionaire. It was heartbreaking to see that those closest to her were the most resistant to her advice.

​However, Radhika didn't let this negativity break her spirit. She used this time to sharpen her mind. Every day, the company organized online training sessions for each product. Radhika attended them religiously, absorbing every bit of information about the ingredients and their benefits. She realized that while she couldn't change people's mindsets, she could definitely strengthen her own knowledge. She was preparing herself for a future where her results would speak louder than their excuses.

भाग 422: ईर्ष्या की दीवार और ज्ञान की शक्ति

​लॉकडाउन के दौरान राधिका ने एक बहुत ही कड़वा सच सीखा: लोग अस्पताल में जाकर मरना पसंद करेंगे, लेकिन अपने ही किसी जानने वाले को सफल होते नहीं देख सकते। जब राधिका उन्हें सेहत का रास्ता दिखाती, तो वे सौ बहाने बनाते। उनके दिमाग में यह डर नहीं था कि वे बीमार हैं, बल्कि यह डर था कि "कहीं राधिका हमसे पैसे कमाकर करोड़पति न बन जाए।" यह देखना बड़ा दुखद था कि जो लोग परिचित थे, वही सबसे ज्यादा अड़चन पैदा कर रहे थे।

​लेकिन राधिका ने इस नकारात्मकता को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उसने इस समय का उपयोग खुद को निखारने में किया। कंपनी की तरफ से रोज ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाती थी, जिसमें हर एक प्रोडक्ट की बारीकी से जानकारी मिलती थी। राधिका हर ट्रेनिंग को बड़े ध्यान से अटेंड करती थी। उसने जान लिया था कि वह लोगों की सोच तो नहीं बदल सकती, लेकिन अपना ज्ञान इतना मजबूत कर सकती है कि एक दिन उसकी सफलता ही इन बहानों का जवाब बनेगी। वह खुद को उस कल के लिए तैयार कर रही थी जहाँ उसके नतीजे इन लोगों की बोलती बंद कर देंगे।

निष्कर्ष: लोग आपकी तब तक बुराई करेंगे जब तक आप सफल नहीं हो जाते, और सफल होने के बाद वही लोग कहेंगे कि हम तो जानते थे कि तुम कर लोगी।

आज का विशेष सवाल: क्या आपने भी कभी महसूस किया है कि आपके अपने ही लोग आपकी तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट बनते हैं? क्या आपको भी लगता है कि लोग सलाह से ज्यादा दूसरों की कमाई पर नजर रखते हैं? कमेंट में अपना दर्द या अनुभव साझा करें, क्योंकि यहाँ हर कोई एक संघर्ष की कहानी है।

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