राधिका की डायरी Part 375: A New Chapter and the Eternal Refuge
राधिका की डायरी
Part 375: A New Chapter and the Eternal Refuge
The intense season of forest Kosa was over, and a new responsibility awaited Radhika. Now, she had to focus on 'Malbari Kosa' and lead the plantation work in the farmers' fields. This required a different kind of energy—convincing farmers and managing the land. Upon returning to her small rented room, Radhika didn't let exhaustion overcome her. After a brief moment of rest and a cup of tea to soothe her tired body, she reached for her constant companion—her spiritual discipline. She spread a simple mat on the floor and sat down to recite the Sunderkand, returning to the divine refuge that had carried her through the darkest days of the past month.
भाग 375: नया अध्याय और अटूट साधना
जंगल के कोसा का काम अब खत्म हो चुका था और राधिका के सामने एक नई चुनौती खड़ी थी। अब उसे 'मलबारी कोसा' पर ध्यान केंद्रित करना था और किसानों के खेतों में प्लांटेशन (पौधारोपण) का काम करवाना था। यह एक अलग तरह की जिम्मेदारी थी, जिसमें किसानों को प्रेरित करना और खेतों की देखभाल शामिल थी। अपने कमरे पर पहुँचने के बाद, राधिका ने थकान को खुद पर हावी नहीं होने दिया। थोड़ा विश्राम करने और एक कप चाय पीने के बाद, उसने अपनी चटाई बिछाई और सुंदरकांड का पाठ करने बैठ गई। यह वही साधना थी जिसने उसे पिछले एक महीने के तूफानों से लड़ने की शक्ति दी थी।
निष्कर्ष: राधिका ने अपने काम और अपनी भक्ति के बीच जो संतुलन बनाया था, वही उसकी असली ताकत थी। अब कोसा की नई फसल और किसानों के साथ उसका नया सफर शुरू होने वाला था।
मजबूत सवाल: क्या राधिका मलबारी कोसा के इस नए प्रोजेक्ट में भी वैसी ही सफलता पाएगी जैसी उसने जंगल की फसल में पाई थी? क्या उसका मन अब अपनी उन संतानों के पास रहेगा जिन्हें वह पीछे छोड़ आई है?
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