राधिका की डायरी ​Part 380: The Sarpanch’s Support and the Final Seven

 

राधिका की डायरी

Part 380: The Sarpanch’s Support and the Final Seven

​Monday morning brought a new ray of hope. Radhika knew that to reach her target of 25 farmers quickly, she needed someone who held influence in the village. She decided to meet the village Sarpanch (Headman). Her reputation as a hardworking and honest officer had already reached his ears. The Sarpanch was impressed by her dedication—how a lone woman was working so tirelessly for the welfare of his people. He immediately offered his support and called for a small gathering of farmers at his courtyard.

​Through the Sarpanch’s mediation, the process of gathering the remaining seven farmers became much easier. He instructed the local village assistant to help Radhika with the 'Khasra' and 'Naksha' (land documents), ensuring she didn't have to run from pillar to post. By the afternoon, Radhika had not only completed her list of 25 but also had the necessary assurance for their documentation. For the first time in days, she felt a weight lifting off her shoulders. She looked at the 25 files in her bag—they were 25 seeds of change she had successfully planted through her hard work and divine faith.

भाग 380: सरपंच का सहयोग और लक्ष्य की प्राप्ति

​सोमवार की सुबह एक नई उम्मीद लेकर आई। राधिका जानती थी कि अगर उसे 25 किसानों का लक्ष्य जल्दी पूरा करना है, तो उसे गाँव के मुखिया यानी सरपंच का सहारा लेना होगा। राधिका की मेहनत और ईमानदारी की चर्चा पहले ही सरपंच के कानों तक पहुँच चुकी थी। जब वह सरपंच से मिली, तो वह एक अकेली महिला कर्मचारी के इस जज्बे को देखकर दंग रह गए। सरपंच ने तुरंत सहयोग का हाथ बढ़ाया और अपने आंगन में ही कुछ किसानों को बुलवा लिया।

​सरपंच के माध्यम से राधिका की राह बहुत आसान हो गई। जो ७ किसान कम पड़ रहे थे, वे सरपंच के भरोसे पर तुरंत तैयार हो गए। इतना ही नहीं, सरपंच ने पटवारी और स्थानीय सहायकों को निर्देश दिया कि राधिका को खसरा-नक्शा और बाकी कागजात जुटाने में कोई दिक्कत न आए। दोपहर ढलते-ढलते राधिका के पास न केवल 25 किसानों के नाम थे, बल्कि उनके दस्तावेज़ों का काम भी तेजी से आगे बढ़ गया था। कई दिनों बाद राधिका ने राहत की सांस ली। उसके बैग में रखी वे 25 फाइलें उसकी मेहनत, उसकी साधना और सरपंच के विश्वास की जीत थीं।

निष्कर्ष: राधिका ने समझदारी से काम लिया और सरपंच के माध्यम से उस बाधा को पार कर लिया जो उसे नामुमकिन लग रही थी। अब वह 25 परिवारों के भविष्य की नींव रख चुकी थी।

मजबूत सवाल: क्या ये 25 किसान अब पूरी मेहनत से रेशम की खेती करेंगे? और क्या इन फाइलों के जमा होने के बाद राधिका को विभाग की ओर से कोई बड़ी सराहना या नई जिम्मेदारी मिलेगी?

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