राधिका की डायरी Part 350: The Delicate Birth in the Wild

 

राधिका की डायरी

Part 350: The Delicate Birth in the Wild

Radhika had left nothing to chance. By Friday, the forest was prepared like a sterile nursery. The large plastic trays, four feet long and two feet wide, were meticulously scrubbed with bleaching water to eliminate any threat of infection. To protect the future hatchlings from ants and ground insects, she had even spread bleaching powder around the base of every cleaned tree. When the eggs finally arrived, Radhika spread them over paper-lined trays. As the tiny larvae began to emerge, she placed fresh, tender twigs of 'Dhani' (young leaves) over them. Like hungry infants seeking milk, the microscopic silkworms instinctively crawled onto the succulent leaves. These twigs, now crawling with life, were then carefully placed onto the branches of the forest trees, ensuring they were secure enough not to fall. One by one, the life of the forest was transplanted onto its new green home.

भाग 350: वन के आँचल में नन्हा जीवन

राधिका ने कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। शुक्रवार को ही उसने जंगल को एक साफ-सुथरे पालने की तरह तैयार कर दिया था। चार फीट लंबी और दो फीट चौड़ी उन जालीदार प्लास्टिक ट्रे को ब्लीचिंग के पानी से अच्छी तरह धुलवाया गया था ताकि इन्फेक्शन का नामोनिशान न रहे। ज़मीन से रेंगने वाले कीड़ों और चींटियों से बचाने के लिए उसने हर पेड़ के चारों ओर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव पहले ही करवा दिया था। जब अंडे आए, तो राधिका ने उन्हें ट्रे में बिछाए गए कागज़ों पर फैला दिया। जैसे ही अंडों से नन्हे कीड़े बाहर निकले, उसने उनके ऊपर ताज़ी और कोमल 'दानियों' (झारे की छोटी टहनियों) की एक परत बिछा दी। भूखे नन्हे कीड़े, किसी नवजात बच्चे की तरह जो दूध की तलाश में होता है, रस चूसने के लिए उन कोमल पत्तियों पर चढ़ने लगे। जैसे-जैसे कीड़े इन टहनियों पर चढ़ते गए, राधिका ने उन्हें बहुत सावधानी से ले जाकर पेड़ों की डालियों पर इस तरह टिका दिया कि वे गिरें नहीं। देखते ही देखते, पूरा जंगल इन नन्हीं जानों से चहक उठा।

निष्कर्ष: माँ की ममता घर में हो या कर्मक्षेत्र में, वह हमेशा सुरक्षा का घेरा बुनती है। राधिका की मेहनत और ब्लीचिंग पाउडर की उस लकीर ने नन्हे कीड़ों को सुरक्षा दी थी, ठीक वैसे ही जैसे उसकी प्रार्थनाएँ उसके बच्चों की रक्षा कर रही थीं।

मजबूत सवाल: क्या राधिका की यह वैज्ञानिक तैयारी और उसकी दिन-रात की तपस्या इन नन्हे रेशम के कीड़ों को कुदरत के कहर और दुश्मनों की नज़र से बचा 

पाएगी?

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