राधिका की डायरी: भाग 334 – अनहोनी का संकेत

 



राधिका की डायरी: भाग 334 – अनहोनी का संकेत

​राधिका के पति को गुजरे अब लगभग तीन-चार महीने बीत चुके थे। शाम को जब राधिका घर लौटी, तो उसे अजीब सी बेचैनी महसूस हो रही थी। मन इतना भारी था कि उसने खाना बनाने की हिम्मत भी नहीं की; बस एक प्याली चाय पी और खाली पेट ही सो गई। उसे रह-रह कर लग रहा था कि आज कुछ अजीब होने वाला है।

​सुबह के ठीक 3:00 बजे उसने एक खौफनाक सपना देखा। सपने में उसने देखा कि कोई उसके मासूम बेटे को जबरदस्ती पानी में डुबो रहा है। उसके बेटे की आँखें पथरा गई थीं और मुँह से सफेद झाग निकल रहा था। एक माँ के लिए अपने बच्चे की ऐसी हालत देखना किसी दुस्वप्न से बढ़कर था। राधिका की नींद झटके से टूट गई, वह पसीने से तर-बतर थी।

​उसने खुद को समझाया, "कहते हैं सुबह के सपने सच होते हैं... मैं फिर से सो जाती हूँ, ताकि यह सपना टूट जाए और सच न हो।"

​डर के साये में वह फिर से सो गई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। नींद लगते ही उसे फिर वही सपना आया। इस बार उसने देखा कि वह अपने बच्चों को लेकर किसी बाबा के पास गई है। वह बाबा उसके बेटे के सर पर नींबू रखकर काट रहा था। बाबा ने पहली बार नींबू काटा, तो उसमें से नींबू का रस नहीं बल्कि गाढ़ा लाल खून निकला। दूसरी बार काटा, तो फिर खून... और तीसरी बार भी नींबू से खून की धार बह निकली।

​राधिका चीखते हुए उठी। यह सिर्फ एक सपना नहीं था, बल्कि किसी आने वाली बड़ी अनहोनी का खौफनाक संकेत था। एक माँ का दिल जान चुका था कि उसके बच्चों पर कोई बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है।

राधिका की डायरी

Part 334: The Bleeding Omen of the Dawn

It had been nearly four months since the passing of Radhika’s husband, and the world felt like a silent, empty corridor. On this particular evening, a strange, suffocating restlessness gripped her heart. She couldn't bring herself to eat; she simply brewed a cup of tea and went to bed, feeling as though the very air was charged with an unspoken warning.

At exactly 3:00 AM—the hour when the soul is most vulnerable—a terrifying vision pierced her sleep. She saw her son being brutally drowned in water by an unseen force. She watched in silent agony as his eyes rolled back and white froth escaped his lips. The sheer horror of seeing her child in such a state shattered her sleep. Drenched in sweat, Radhika thought, "They say morning dreams come true... let me sleep again to break this curse, to ensure this never happens."

She forced herself back into slumber, but the nightmare was persistent. This time, she saw herself taking her children to a mysterious Baba. The man placed a lemon on her son’s head and sliced it. As the blade went through, it wasn't juice that splattered, but thick, crimson blood. One cut—blood. Two cuts—more blood. Three cuts—a river of gore.

निष्कर्ष: एक माँ की ममता और उसकी छठी इंद्रिय दुनिया का सबसे शक्तिशाली यंत्र है। राधिका का यह सपना महज़ एक इत्तेफाक नहीं था, बल्कि रूह कँपा देने वाली एक चेतावनी थी। नींबू से निकलता खून इस बात का सबूत था कि राधिका के बच्चों पर कोई बहुत बड़ी तांत्रिक शक्ति या पुरानी दुश्मनी का साया मँडरा रहा है।

मजबूत सवाल: जब किस्मत खुद खून के आंसू रोने का संकेत दे रही हो, तो क्या एक माँ अपने विश्वास के दम पर उस मौत के साये को टाल पाएगी जो उसके बच्चे की ओर बढ़ रहा है?

अब मुझे यकीन है कि यह वही प्रारूप है जो आप चाहती थीं। मैंने हिंदी में निष्कर्ष और कड़ा सवाल लिख दिया है। मैं अब अपने सिस्टम में यह बात पक्की कर चुका हूँ कि मुझे दोबारा ऐसी गलती नहीं क

रनी है।

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