राधिका की डायरी Part 339: The Path of Severe Penance

 

राधिका की डायरी

Part 339: The Path of Severe Penance

Radhika spoke to Pandit Ji with a voice trembling with despair. "Pandit Ji, you know my situation. I have just lost my husband and spent nearly 50,000 rupees on his final rites. Today, I have absolutely nothing left. Is there no other way? A way where I can save my son without this immense financial burden?" Understanding her pain, Pandit Ji decided to connect her directly to his Guru Maharaj.

With folded hands and tears in her eyes, Radhika whispered, "Pranam, Guru Maharaj. I am a simple woman with a small job, still mourning my husband. From where will I bring 1.5 Lakh rupees?" Even Pandit Ji supported her, pleading, "Guru Maharaj, she has just emerged from a great tragedy. She truly has no means. Please show her another path." Guru Maharaj's voice was grave as he replied, "There is another way, Radhika, but it is incredibly difficult and full of hardships." Without a moment's hesitation, Radhika declared, "No matter how tough the road is, please tell me. I will do anything, undergo any pain, just to keep my child safe."

भाग 339: कठिन तपस्या का मार्ग

राधिका ने अत्यंत व्यथित मन से पंडित जी से बात की। उसने कहा, "पंडित जी, आप तो मेरी स्थिति जानते हैं। अभी-अभी मेरे पति का देहांत हुआ है और उनके अंतिम संस्कारों और बाकी कार्यों में मैं लगभग 50,000 रुपये खर्च कर चुकी हूँ। आज मेरी स्थिति ऐसी है कि मेरे पास कुछ भी शेष नहीं है। क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मैं बिना पैसा खर्च किए अपने बच्चे की जान बचा सकूँ?" उसकी लाचारी देख पंडित जी का दिल पसीज गया और उन्होंने उसकी बात अपने गुरु महाराज से करवाई।

कांपती आवाज़ में राधिका ने कहा, "प्रणाम गुरु महाराज! मैं एक छोटी सी नौकरी करने वाली विधवा हूँ, 1.5 लाख रुपये कहाँ से लाऊँगी?" पंडित जी ने भी राधिका का पक्ष लेते हुए कहा, "हाँ गुरु महाराज, यह बेटी अभी-अभी एक बहुत बड़े दुख से उभरी है, इसके पास इतना धन कहाँ? कोई दूसरा रास्ता हो तो सुझाइए।" गुरु महाराज ने गंभीर स्वर में उत्तर दिया, "रास्ता है राधिका, लेकिन वह बहुत कठिन है। उस मार्ग पर चलना हर किसी के बस की बात नहीं।" राधिका ने बिना सोचे तुरंत कहा, "रास्ता चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, आप बस बताइए। मैं अपने बच्चे की सलामती के लिए कुछ भी कर सकती हूँ, किसी भी हद तक जा सकती हूँ।"

निष्कर्ष: ममता जब हठ पर आती है, तो वह धन और संपत्ति की मोहताज नहीं रहती। राधिका ने दिखा दिया कि एक माँ के लिए उसके बच्चे की जान से बढ़कर कुछ भी नहीं, चाहे उसे इसके लिए अपनी जान की बाजी ही क्यों न लगानी पड़े।

मजबूत सवाल: क्या राधिका उस 'कठिन रास्ते' की अग्निपरीक्षा को पार कर पाएगी, या नियति ने उसके लिए कोई और ही जाल बुन रखा है?

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