राधिका की डायरी Part 361: Preparing for the Silent Storm

 

राधिका की डायरी

Part 361: Preparing for the Silent Storm

The whispers of the 'Corona' virus were no longer just rumors; they were becoming a looming reality. Radhika, with her sharp intuition, realized that if a lockdown was imposed, her work in the forest and her income from Ayurveda would hit a standstill. She was already drowning in expenses; her earnings were barely keeping pace with the constant outflow of money for her son’s protection rituals and daily survival. She even had some mounting debts.

After thinking deeply through the night, she decided that she needed a financial safety net. She knew that once the world shut down, no one would lend a penny. Taking a calculated risk, she applied for loans from two different self-help groups (Samuh). She was preparing for a battle where she might be without a job or a regular salary. Her priority was clear: no matter what happened to the world, her children should not go hungry, and her year-long penance must not be interrupted by lack of funds.

भाग 361: खामोश तूफान की तैयारी

कोरोना के बारे में उड़ती खबरें अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई बनती जा रही थीं। राधिका ने बहुत गहराई से सोचा और आने वाले संकट को भाँप लिया। उसे समझ आ गया था कि अगर लॉकडाउन हुआ, तो जंगल की नौकरी और आयुर्वेद का काम, दोनों ही खतरे में पड़ सकते हैं। उसकी स्थिति पहले से ही तंग थी; जितनी उसकी कमाई नहीं थी, उससे कहीं ज़्यादा उसका खर्च था। कुछ कर्ज भी उसके सिर पर चढ़ चुके थे।

पूरी रात की उधेड़बुन के बाद, उसने एक बड़ा फैसला लिया। वह जानती थी कि अगर एक बार सब कुछ बंद हो गया, तो कोई उसे एक रुपया भी उधार नहीं देगा। अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए उसने दो अलग-अलग 'समूह' (Self-help groups) में लोन के लिए अप्लाई कर दिया। वह एक ऐसी लड़ाई के लिए खुद को तैयार कर रही थी जहाँ शायद उसके पास नौकरी न रहे, पर उसे अपने बच्चों का पेट पालना था और अपनी एक साल की तपस्या को भी जारी रखना था। राधिका की दूरदर्शिता उसे उस अंधेरे वक्त के लिए ढाल तैयार करने पर मजबूर कर रही थी।

निष्कर्ष: राधिका ने मुश्किल वक्त आने से पहले ही अपनी कमर कस ली थी। उसने समूह से पैसे मांगकर एक जुआ खेला था, ताकि लॉकडाउन की बेड़ियों में उसका परिवार और उसकी पूजा न जकड़ी जाए।

मजबूत सवाल: क्या समूह से मिलने वाला यह पैसा राधिका को लॉकडाउन के दौरान सहारा देगा, या यह कर्ज का बोझ उसकी मुश्किलों को और बढ़ा देगा?

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