राधिका की डायरी यादों का मेला और पत्थर दिल

 


राधिका की डायरी

​Kavya sat in the dim light, the pages of her diary now wet with more than just ink. She realized that she had woven him into every breath, every joy, and every sorrow of her life. He wasn't just a part of her world; she had made him her entire world.

​"I tied my every tomorrow to you," she wrote with a trembling hand. "How was I to know that in a single moment, my future would be snatched away? You left me alone in a crowded fair of memories."

​The pain of his absence was now a physical ache. Earlier, she never needed a reason to smile, but today, even with a thousand reasons, she couldn't find a single smile. It was as if he hadn't just left her; he had taken her ability to be happy along with him.

​She looked at the wall, questioning the coldness of his heart. "Even stones melt sometimes," she thought, "but you... what are you made of? How can you bury your heart and just keep living as if I never existed?"

​Despite the anger and the 'why', her pen finally traced the words that her heart refused to let go of: "I have always loved you, and I will continue to love you. Love you so much."

​हिंदी अनुवाद: यादों का मेला और पत्थर दिल

​काव्या धुंधली रोशनी में बैठी थी, उसकी डायरी के पन्ने अब केवल स्याही से नहीं बल्कि आंसुओं से भी भीगे थे। उसने महसूस किया कि उसने उसे अपनी जिंदगी की हर सांस, हर खुशी और हर दुख में पिरो लिया था। वह सिर्फ उसकी दुनिया का एक हिस्सा नहीं था; उसने उसे ही अपनी पूरी दुनिया बना लिया था।

​"मैंने अपना हर कल तुमसे जोड़ रखा था," उसने कांपते हाथों से लिखा। "मुझे क्या पता था कि एक ही पल में मुझसे मेरा कल छीन लिया जाएगा? तुमने मुझे यादों के इस भरे मेले में अकेला छोड़ दिया।"

​उसकी अनुपस्थिति का दर्द अब एक शारीरिक पीड़ा बन चुका था। पहले उसे मुस्कुराने के लिए किसी वजह की जरूरत नहीं होती थी, लेकिन आज हजार वजहों के बाद भी उसे एक मुस्कान नहीं मिल रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह सिर्फ उसे छोड़कर नहीं गया, बल्कि उसके मुस्कुराने की काबिलियत भी साथ ले गया।

​उसने दीवार की ओर देखा, उसके दिल की बेरुखी पर सवाल किया। "कभी-कभी तो पत्थर भी पिघल जाते हैं," उसने सोचा, "लेकिन तुम... तुम किस मिट्टी के बने हो? तुम अपने दिल को दफन करके कैसे बस जिए जा रहे हो, जैसे मेरा कोई वजूद ही न हो?"

​इतने गुस्से और 'क्यों' के बावजूद, उसकी कलम ने आखिरकार वही शब्द लिखे जिन्हें उसका दिल छोड़ने को तैयार नहीं था: "मैंने हमेशा तुम्हें ही प्यार किया है, और तुम्हें ही प्यार करती रहूंगी। लव यू सो मच।"

​निष्कर्ष (Conclusion)

​यह डायरी का पन्ना उस चरम सीमा को दर्शाता है जहाँ प्रेम एक लत बन जाता है। जब हम अपनी पूरी खुशी किसी एक इंसान पर निर्भर कर देते हैं, तो उनका जाना हमें खुद से ही खफा कर देता है। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ इंसान अपनी पहचान खो देता है और केवल यादों के सहारे जीवित रहता है।

​आज का सवाल (Question of the Day)

"क्या किसी को अपनी पूरी दुनिया मान लेना प्यार की पराकाष्ठा है, या यह खुद को तबाह करने की शुरुआत है?"

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