राधिका की डायरी Part 336: The Ominous Revelation

 


राधिका की डायरी


Part 336: The Ominous Revelation

After days of relentless struggle and despair, Radhika finally found a glimmer of hope in Pandit Ji's words. But that hope soon turned into a chilling fear. Pandit Ji, after carefully examining her son’s horoscope, confirmed her worst fears: the child’s कुंडली (horoscope) showed powerful 'Maar Kes Yog' (a planetary alignment indicating severe life-threatening danger or even death). The priest revealed that someone within her own family was plotting against her children, specifically targeting her son, to seize their small property and the house her husband had left behind. They were planning something sinister, something that could lead to 'मृत्यु तुल्य कष्ट' (suffering akin to death) or even actual death.

Radhika’s world collapsed around her. Her legs felt like jelly, and the ground beneath her seemed to vanish. All her life, she had endured loneliness and hardship, clinging to the sole hope that one day her children would be by her side, and they would all live a peaceful, happy life. This revelation, however, threatened to snatch away that very dream. The thought of losing her children, after all she had sacrificed, was unbearable. The very foundation of her future, her reason for living, now hung by a precarious thread.

भाग 336: अशुभ रहस्योद्घाटन

कई दिनों की अथक जद्दोजहद और निराशा के बाद, राधिका को पंडित जी के शब्दों में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी। लेकिन वह उम्मीद जल्द ही एक रोंगटे खड़े कर देने वाले डर में बदल गई। पंडित जी ने, उसके बेटे की कुंडली का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के बाद, उसके सबसे बुरे डर की पुष्टि कर दी: बच्चे की कुंडली में शक्तिशाली 'मारक केश योग' बन रहा था। पंडित जी ने बताया कि यह योग उसके जीवन को अत्यंत गंभीर खतरे में डाल सकता है, यहाँ तक कि मृत्यु का कारण भी बन सकता है। पुजारी ने आगे खुलासा किया कि उसके अपने परिवार में ही कोई उसके बच्चों के खिलाफ साजिश रच रहा था, विशेष रूप से उसके बेटे को निशाना बनाया जा रहा था, ताकि उनकी छोटी सी संपत्ति और उसके पति द्वारा छोड़ा गया घर हथियाया जा सके। वे कुछ भयावह योजना बना रहे थे, कुछ ऐसा जो 'मृत्यु तुल्य कष्ट' (मृत्यु के समान पीड़ा) या वास्तविक मृत्यु का कारण बन सकता था।

यह सुनकर राधिका की दुनिया उसके चारों ओर ढह गई। उसके पैरों तले से ज़मीन खिसक गई, और वह स्तब्ध रह गई। उसने अपना पूरा जीवन अकेले काटा था, इस उम्मीद में कि कभी न कभी उसके बच्चे उसके साथ होंगे, और वह एक सुखद व शांतिपूर्ण जीवन जी पाएगी। हालाँकि, इस रहस्योद्घाटन ने उसके उस सपने को भी छीनने की धमकी दी। इतना सब कुछ बलिदान करने के बाद अपने बच्चों को खोने का विचार असहनीय था। उसके भविष्य की नींव, उसके जीने का एकमात्र कारण, अब एक पतली सी डोर पर टिका था।

निष्कर्ष: पंडित जी का खुलासा राधिका के लिए सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक भयानक सच्चाई थी जिसने उसके हर डर को हकीकत में बदल दिया। जिस सुख की कल्पना में उसने अपना सारा जीवन बिताया था, वह अब खतरे में था।

मजबूत सवाल: जब किस्मत में ही 'मारक योग' लिखा हो और अपने ही जान के दुश्मन बन जाएँ, तो क्या एक माँ केवल दैवीय सलाह के सहारे अपने बच्चों के इस डघन भाग्य को बदल पाएगी?

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भाग 4 = एक नया मोड़ टर्निंग प्वाइंट

भाग 3 = शुभ दीपावली जैसे दीपावली में दीपक की रोशनी से घर में उजाला हो जाता है वैसे ही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सब के जीवन से दुख परेशानी चिंता उदासी हमेशा हमेशा के लिए चली जाए खुशी मुस्कुराहट सुख समृद्धि धन वैभव हमेशा हमेशा के लिए रोशनी बन कर आ जाए शुभ दीपावली

' भाग 1= पाँचवी पास ने क्यों शुरू किया आयुर्वेद का बिज़नेस? मेरी कहानी!'