राधिका की डायरी ​Part 387: An Investment in Future and a Mother’s Gift

 


राधिका की डायरी

Part 387: An Investment in Future and a Mother’s Gift

​Radhika understood that while the administrative work at the Janpad office would take its own time, the money now in her hands was hers to command. She decided to use it wisely. She called the Ayurvedic consultant and made a significant purchase of products worth ₹65,000. For her, this wasn't just a purchase; it was a seed for a secondary income and a path toward wellness. She knew that financial independence was the only way to fight her long-term battles.

​The most joyous occasion, however, was her son's upcoming birthday. Instead of going back to the hostile environment of her in-laws' village, she decided to celebrate it on her own terms. She called her son to her rented room, 150 kilometers away from his home. It was a bold and emotional move. For the first time in a long while, her small room, which usually echoed with prayers and the silence of her struggle, was about to be filled with the laughter and presence of her beloved son.

भाग 387: भविष्य का निवेश और ममता का उपहार

​राधिका समझती थी कि जनपद पंचायत की फाइलें पास होना एक सरकारी प्रक्रिया है, जिसमें उसका कोई नियंत्रण नहीं है और उसमें वक्त लगेगा ही। लेकिन जो पैसा अब उसके हाथ में आया था, उसका फैसला उसे खुद करना था। उसने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए आयुर्वेद वाले सर को फोन किया और ₹65,000 के उत्पाद खरीदे। यह उसके लिए केवल खरीदारी नहीं थी, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा निवेश था।

​लेकिन सबसे बड़ी खुशी का मौका उसके बेटे का जन्मदिन था। ससुराल के कड़वे माहौल में जाने के बजाय, राधिका ने एक बड़ा फैसला लिया। उसने अपने बेटे को अपने पास बुलाया—उस किराए के कमरे में जो उसके घर से 150 किलोमीटर दूर था। यह एक साहसी कदम था। वह कमरा, जो अब तक सिर्फ राधिका की प्रार्थनाओं और उसकी खामोश लड़ाई का गवाह था, अब उसके बेटे की हंसी और मौजूदगी से चहकने वाला था। राधिका ने अपनी मेहनत की कमाई से अपने बेटे के लिए एक सुरक्षित और खुशहाल पल तैयार किया था।

निष्कर्ष: राधिका ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि एक विजनरी माँ भी है। उसने एक तरफ अपना भविष्य सुरक्षित किया और दूसरी तरफ अपने बेटे को वह प्यार दिया जिसकी उसे सबसे ज्यादा जरूरत थी।

मजबूत सवाल: क्या राधिका का बेटा इस 150 किलोमीटर लंबे सफर को तय कर अपनी माँ के पास सुरक्षित पहुँच पाएगा? और क्या ससुराल वाले इस मुलाकात में कोई अड़ंगा डालने की कोशिश करेंगे?

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