राधिका की डायरी ​Part 405: The Great Retreat to the Sanctuary


राधिका की डायरी

Part 405: The Great Retreat to the Sanctuary

​As the whispers of a complete lockdown turned into a terrifying reality, panic gripped everyone. People began hoarding rations, uncertain of how long the world would remain shut. Radhika, too, had to make a swift and strategic choice. She realized that staying alone at her workplace, 150 kilometers away from her world, would be a trap. If she got stuck there, she wouldn't be able to reach her children in an emergency. With a heavy but determined heart, she decided to temporarily close that chapter and move back to her 6-year-old sanctuary—the room that was just 20 kilometers away from her son and 5 kilometers from her parents' home.

​She packed her life quickly. She moved all her Ayurvedic products, her essentials, and a stock of rations to her old room. This room, for which she had paid rent faithfully for six years, finally became her fortress in the storm. As she locked the door of her workplace and made the long journey back, she felt a sense of relief. She was now in a zone where, despite the lockdown, she was physically closer to her son. Surrounded by her bags of grain and her boxes of Ayurvedic medicine, Radhika settled into her old sanctuary, ready to face the unknown pandemic from a place of strength and proximity.

भाग 405: सुरक्षित ठिकाने की ओर वापसी

​जैसे ही यह साफ हुआ कि अब लॉकडाउन लग जाएगा, चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। लोग महीनों का राशन भरने लगे क्योंकि किसी को नहीं पता था कि यह कैद कब तक चलेगी। राधिका ने भी तुरंत एक बड़ा फैसला लिया। वह समझ गई कि अपने कार्यस्थल वाले कमरे पर, जो उसके बच्चों से 150 किलोमीटर दूर था, अकेले रुकना खतरे से खाली नहीं है। अगर वह वहां फंस गई, तो न कभी बच्चों के पास पहुँच पाएगी और न ही वहां रहकर कुछ कर पाएगी। उसने तुरंत अपना सामान समेटा और अपने उस 6 साल पुराने कमरे की ओर रुख किया, जो उसके बेटे से महज 20 किलोमीटर और मायके से 5 किलोमीटर दूर था।

​राधिका ने बड़ी फुर्ती से अपने सारे आयुर्वेद के प्रोडक्ट्स, राशन और जरूरत का हर सामान उस पुराने कमरे में शिफ्ट कर लिया। जिस कमरे का किराया वह 6 साल से अपनी मेहनत की कमाई से भर रही थी, आज वही कमरा इस वैश्विक आपदा में उसका सबसे सुरक्षित किला बन गया था। 150 किलोमीटर का वह सफर तय कर जब वह अपने पुराने कमरे में पहुँची, तो उसने राहत की सांस ली। अब वह ऐसी जगह पर थी जहाँ से वह अपने बेटे के करीब थी। राशन और दवाइयों के साथ उसने खुद को वहां सुरक्षित कर लिया। बाहर दुनिया थम रही थी, लेकिन राधिका ने खुद को एक ऐसी जगह खड़ा कर लिया था जहाँ से वह अपने बच्चों पर नजर रख सके।

निष्कर्ष: राधिका की 6 साल की दूरदर्शिता आज काम आई थी। वह कमरा जिसे उसने कभी नहीं छोड़ा, आज उसकी आजादी और सुरक्षा का एकमात्र गवाह बना।

मजबूत सवाल: क्या इस बंद दुनिया में राधिका अपने बेटे से मिल पाएगी, जो अब उससे महज 20 किलोमीटर दूर है? और क्या उसका आयुर्वेद का स्टॉक इस मुश्किल समय में उसके काम आएगा?

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