राधिका की डायरी Part 419: Investing in Knowledge During the Pause
राधिका की डायरी
Part 420: Investing in Knowledge During the Pause
Radhika found a way to survive the crisis without losing her vision. She understood that if she couldn't go out to work, she must prepare herself so thoroughly that no one could stop her once the lockdown lifted. She spent every waking hour gaining deep knowledge about her products and the business model. She turned her isolation into a classroom. Whatever small sales she managed to make from her Ayurvedic products were barely enough to cover the daily household expenses, but she didn't mind. She knew that the real profit would come later. Her focus was clear: sharpen the axe so well that when it’s time to cut the wood, it happens with just one blow.
भाग 419: ठहराव के बीच ज्ञान की साधना
संकट के उस दौर में राधिका ने हार मानने के बजाय एक रास्ता निकाला। वह समझ गई थी कि अगर वह बाहर जाकर काम नहीं कर सकती, तो उसे खुद को इतना तैयार कर लेना चाहिए कि लॉकडाउन हटते ही कोई उसे रोक न सके। उसने अपना हर पल अपने प्रोडक्ट्स और बिजनेस की बारीकियों को समझने में लगा दिया। उसने अपने एकांत को एक पाठशाला में बदल दिया। आयुर्वेद के जो थोड़े-बहुत प्रोडक्ट्स बिकते थे, उनसे होने वाली कमाई घर के राशन और खर्चों में ही निकल जाती थी, लेकिन राधिका को इसका मलाल नहीं था। वह जानती थी कि असली मुनाफा तब होगा जब वह एक विशेषज्ञ बनकर मैदान में उतरेगी। उसका लक्ष्य साफ था: अपनी कुल्हाड़ी की धार इतनी तेज कर लो कि जब पेड़ काटने का समय आए, तो एक ही वार काफी हो।
निष्कर्ष: वक्त जब खराब हो, तब खुद पर किया गया निवेश (Investment) ही भविष्य में सबसे बड़ा रिटर्न देता है। राधिका अब सिर्फ एक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता ज्ञान का भंडार बन रही थी।
आज का विशेष सवाल: दोस्तों, क्या आपने भी कभी विपरीत परिस्थितियों में खुद को निखारने का फैसला किया है? क्या आपको लगता है कि ज्ञान ही वह शक्ति है जो गरीबी और मजबूरी की बेड़ियों को काट सकती है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।
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