राधिका की डायरी"सदियों पुराना रिश्ता और तड़प का गुनाह: मेरी अधूरी मोहब्बत"

 

सदियों का साथ और तड़प का ज़हर: एक अमर दास्तान

राधिका की डायरी

हम तो ज़िंदगी का ज़हर पी के साहिब हैं, वो जिसके लिए आज हम मर रहे हैं।

बड़ा खौफ था मेरी गुरबत से जिनको, मेरी मौत से उनको शोहरत मिलेगी।

(We are the masters who have drunk the poison of life, for whom we are dying today. Those who were terrified of my poverty will find fame through my death.)

गज़ल: यही है फसाना हमारा तुम्हारा

ज़माना दीवाना हमारा तुम्हारा।

ज़माने की रस्मों में शामिल रहेगा, वो मिलना मिलाना हमारा तुम्हारा।

गुलों की किताबों का उनवान होगा, यही मुस्कुराना हमारा तुम्हारा।

मुलाकात अपनी है सदियों पुरानी, ये रिश्ता पुराना हमारा तुम्हारा।

(This is our story, the world is crazy for us. Our meetings will be part of the world's traditions. Our smiles will be the titles of books of flowers. Our meeting is centuries old; this relationship of ours is ancient.)

जिसे किसी का प्यार ना मिले उसे से पूछो, प्यार में तड़प तड़प के जीने की सज़ा उससे पूछो।

जो प्यार ना करे वो क्या जाने प्यार की तड़प, जो प्यार में तड़प तड़प कर जीते हैं उससे पूछो।

दिल कैसे तड़पता है आँखें कैसे रोती हैं उससे पूछो, जिसे प्यार किया हो वो लौट कर ना आये तो वह कैसे जीता है उससे पूछो।

(Ask the one who doesn't get anyone's love, ask them about the punishment of living while pining in love. Those who don't love, what do they know of love's longing? Ask those who live through that pining. Ask how the heart throbs and how the eyes weep; ask how one lives when the one they loved never returns.)

सदियों से जी रहे हैं प्यार में तेरी याद में, नींद ना आय जुदाई में तेरी रात में।

तेरी बेरुखी सताती है हमको इतना कि, हर पल लगता है कि जैसे जी रहे हों किसी गुनाह में।

(I have been living for centuries in your love and memory; sleep doesn't come in the nights of your separation. Your indifference haunts me so much that every moment feels as if I am living in some sin.)

मज़बूत टाइटल (Title)

"सदियों पुराना रिश्ता और तड़प का गुनाह: मेरी अधूरी मोहब्बत"

आज का मज़बूत सवाल (The Strong Question) ❓

"क्या कभी आपको भी ऐसा महसूस हुआ है कि किसी की याद में जीना, किसी अनकहे गुनाह की

 सज़ा काटने जैसा है?"

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