राधिका की डायरी "कागज पर उतरा दिल का दर्द: तुम दूर होकर भी पास हो"

 "कागज पर उतरा दिल का दर्द: तुम दूर होकर भी पास हो"

डायरी के मार्मिक शब्द (Original Text from Diary)

"ये शब्द नहीं हैं, ये लब्ज नहीं हैं

ये दर्द है दिल का जो कागज में उतर कर बैठा है

कोई न कोई कहीं ना कहीं है ऐसा

जो हमारे दिल में छुप कर बैठा है।

महबूब के मेरे जो इनायत कभी कम ना होती

मेरी आँखें उन्हें याद करके नम ना होती

झुका देते आसमां उनके कदमों पर

जो उनकी मोहब्बत हमारे लिए कम ना होती।

तेरे शहर से तेरी गली से तो दूर हो जाएँगे हम

पर अपने दिल से दूर हमें कैसे करोगे।

आपकी आँखों से आँखों के सपनों से तो दूर हो जाएँगे हम

पर अपनी यादों से दूर हमें कैसे करोगे।

जब जाना था हमसे दूर हमेशा के लिए

तो यादों को भी अपनी हमसे दूर ले जाना था

जब साथ नहीं देना था हमारा जीवन भर

तो हमारी जिन्दगी में तो नहीं आना था।

आप दूर हो हमारी आँखों से हमसे दूर नहीं

आप दूर हो हमारे शहर से हमारे सपनों से दूर नहीं

आप दूर हो हमारी धड़कन से हमारे दिल से दूर नहीं

आप दूर हो हमारे घर से हमारी यादों से दूर नहीं।"

English Translation (अंग्रेजी अनुवाद)

The Resonance of Presence

"These are not just words, nor mere phrases; this is the ache of a heart that has settled upon this paper. There is someone, somewhere, who remains hidden deep within my soul.

Had my beloved's grace never diminished, my eyes would never have grown moist in their memory. I would have brought the very heavens to their feet, had their love for me never faltered.

I may distance myself from your city and your streets, but how will you ever remove me from your heart? I may fade from your sight and from the dreams within your eyes, but how will you ever separate me from your memories?

If you intended to leave me forever, you should have taken your memories along with you. If you were not meant to stand by me throughout life, you should never have entered my existence at all.

You are distant from my eyes, yet not away from me. You are far from my city, yet not from my dreams. You are away from my pulse, yet not from my heart. You are far from my home, yet never away from my memories."

मज़बूत शीर्षक (Title)

"कागज पर उतरा दिल का दर्द: तुम दूर होकर भी पास हो"

निष्कर्ष और मज़बूत सवाल (Conclusion & Strong Question) ❓

निष्कर्ष: आपकी यह रचना इस कड़वी सच्चाई को बयां करती है कि शरीर का दूर जाना आसान है, लेकिन रूह का नाता तोड़ना नामुमकिन। 'यादों को साथ न ले जाने' की आपकी शिकायत बहुत जायज है, क्योंकि वही यादें अक्सर इंसान को आगे बढ़ने नहीं देतीं।

सवाल: "राधिका जी, जब कोई कहता है कि 'जो दिखता है वो होता नहीं', तो क्या आपको लगता है कि खामोशी में बसा हुआ प्यार, शोर मचाने वाले प्यार से कहीं ज्यादा मज़बूत होता है?"

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