अंधेरे रास्ते और अनसुलझे सवाल 🌙 राधिका उस बाइक वाले के पास बाइक में बैठी तो थी डरी सहमी सी और बाइक में भी उसने अपने और उसमें डिस्टेंस बनाकर रखा था ताकि बाइक चलाते समय टच ना हो पाए। दिमाग में बहुत सारे ख्याल आ रहे थे। अगर यह इसी अंधेरी रात में कहीं अंधेरी जगह में कहीं सुनसान इलाके में लेकर गया तो? किसी घर में ले जाकर बंद कर दिया तो? क्या वह उस लड़के से जीत पाएगी? अगर उसने जबर्दस्ती करने की कोशिश करी तो क्या करेगी राधिका? यही सोचते सोचते वह चुप बैठी थी, कुछ बात भी नहीं कर रही थी। फिर उसने सोच लिया, "अगर उसने कुछ गलत किया तो... या तो मर जाएगी या तो मार डालेगी, चाहे फिर जेल चली जाए।" यह उसने प्राण कर लिया मन में। अब वह सावधान हो गई और शांति से बैठ गई, एकदम कठोर होकर। बाइक चलती रही, चलती रहे। हालांकि बाइक तेज चल रहा था, लेकिन एक-एक मिनट उसके लिए भारी था। एक-एक मिनट, एक-एक पल सदियों की तरह गुजर रहा था। ऐसा लग रहा था कि कब वह अपनी मंजिल में पहुंचेगी और कब चैन से सांस लेगी। लगभग रास्ता अभी 8 किलोमीटर बचा था, पर 8 किलोमीटर को पहुँचने में उसने पता नहीं कितनी मौतें अपने आप को दे दी, पता नहीं क्या-क्या सोच दी। उसके दिमाग में चल रहा था: "काश मैं लड़का होती तो इतनी बातें नहीं होती, ये मोहब्बत नहीं होती।" "काश मेरा पति अच्छा होता, कमाने वाला होता, मुझसे प्यार करने वाला होता तो आज का दिन मुझे देखना नहीं पड़ता।" "काश कि मेरी माँ होती, मुझसे प्यार करती, मेरी कदर करती। मैं और पढ़ाई करती, बहुत पढ़ती। मैं पुलिस की नौकरी करना चाहती थी। मम्मी के रहते मेरा सपना था कि मैं बहुत पढूंगी और पुलिस में भर्ती हो जाऊंगी। और लगभग पुलिस की तरह ही मेरी हाइट और हेल्थ भी थी, 5 फीट 5 इंच की हाइट थी मेरी।" "अगर मम्मी होती तो ऐसे लड़के के साथ शादी भी नहीं करती, इतनी बड़ी परिवार में नहीं देती जहाँ 20 लोगों का परिवार था। 20 लोगों का खाना बनाना पड़ता था, सात ननदें थीं, उनके लड़के बच्चे थे, 20 गाय बैल थे। सबका काम करते-करते इतना परेशान हो जाती थी उसको खाने को भी नहीं मिलता था। 4:00 बजे खाना खाती थी, वह भी दूसरों का झूठा उठा खाती थी, क्योंकि उसका पति कमाता नहीं था।" "काश कि मैं पैदा ही नहीं होती।" ऐसे हजारों सवाल उसके दिमाग में गूंज रहे थे। उस समय उसको ऐसा लग रहा था कि मैं जिंदा भी क्यों हूँ? अगर उसके बच्चों का ख्याल नहीं होता उसे तो शायद वह आत्महत्या कर लेती। लेकिन उसने अपने जीवन को बचाकर रखा। वह जानती थी कि बिना माँ के बच्चे कैसे होते हैं। उसकी माँ नहीं थी और उसकी माँ नहीं होने के कारण उसका जो जीवन था, उसको यही बात याद थी कि मेरी माँ नहीं होने के कारण मेरे जीवन की यह दशा है। "अगर मैं मर गई तो मेरे बच्चों की क्या दशा होगी? जबकि उनके पिता भी शराबी हैं, कमाता नहीं है। कौन देखभाल करेगा उनका? जीवन भविष्य कैसा रहेगा? वह कहाँ-कहाँ ठोकर खाएंगे?" यह सोचते सोचते वह उस जगह पहुँच गई जहाँ उसे पहुँचना था और उस लड़के ने उसे सही सलामत उस जगह पर छोड़ दिया। राधिका ने उस लड़के को धन्यवाद किया और वहाँ से अपने घर की तरफ निकल गई। वहाँ से घर तक जाते-जाते भी उसके दिमाग में बात चल रही थी कि "देखो, लड़का अच्छा था। उसने सही फैसला लिया और उस लड़के के साथ आ गई, लेकिन अगर वह लड़का गलत होता तो आज उसके साथ क्या होता? पर रहते हैं न दुनिया में कुछ अच्छे लोग भी होते हैं। पर क्या करूँ, कुछ बुरे लोगों के कारण अच्छे लोगों के ऊपर भी शक करना पड़ता है।" रात का समय था, ऊपर से लड़की थी, वह भी जवान। ऐसे बुरे ख्याल तो आने ही थे। घर पहुँच कर उसने चैन की सांस ली। एक लोटा पानी एक सांस में पी लिया और बिना कुछ खाए पिए सो गई। अब उसे रात भर नींद नहीं आ रही थी। यही सोच रही थी। उसने आज के पूरे दिन को टटोला कि आज पूरा दिन उसके लिए कितना कठिन था। कल की चिंता थी। क्या करेगी कल? जानते हैं अगले भाग में।
यह तस्वीर आपके उस गहरे अकेलेपन और थकान को दर्शाती है जब आपने घर पहुँचकर एक साँस में पानी पिया था। अंधेरे कमरे में बैठी वह महिला, जिसके मन में बीते दिन के अपमान और आने वाले कल की अनिश्चितता का बोझ है, आपकी उस रात की मनोदशा को बयाँ करती है।
English Reflection:
"This image captures the raw fatigue of a soul that has been pushed to its limits. Reaching the safety of your home, that single gulp of water was more than just thirst—it was the first moment of relief after hours of survival mode. As you sat in the dark, your thoughts were your only companions, weaving between the pain of the past and the fear of the future. But even in that exhaustion, your resolve to live for your children remained your strongest anchor."
राधिका जी, उस रात की बेचैनी के बाद जब अगली सुबह सूरज उगा, तो आपने क्या फैसला लिया? क्या आप उस एमडी के पास दोबारा गईं, या आपने अपने स्वाभिमान के लिए एक नई राह चुनी?
Dark Paths and Unresolved Questions 🌙
The Inner Turmoil
Radhika sat on the bike, terrified, maintaining a careful distance to avoid any touch. Her mind was a battlefield of 'what ifs.' What if he takes me to a secluded area? What if he locks me up? Can I fight him off? Finally, she made a vow: "If he tries anything, I will either die or kill him, even if I end up in jail." She became rigid and alert, her heart petrified.
A Thousand Deaths in Eight Kilometers
Though the bike was fast, every minute felt like a century. In those final 8 kilometers, she lived through a thousand deaths in her mind. Her thoughts drifted to her regrets:
- "If only I were a man, I wouldn't face such indignity."
- "If only my husband were supportive and loving, I wouldn't see this day."
- "If only my mother were alive. I wanted to be a police officer; I had the height (5'5") and the health for it. My mother would never have married me into a family of 20 people where I had to slave away, eat leftovers at 4 AM, and tend to 20 cattle while my husband earned nothing."
- "If only I hadn't been born at all."
The Anchor: Her Children
At that moment, the thought of suicide crossed her mind, but the image of her children stopped her. She knew the pain of growing up without a mother. She couldn't let her children suffer the same fate, especially with a father who was an alcoholic and non-provider.
The Safe Arrival
To her immense relief, the boy turned out to be a good person. He dropped her safely at her destination. Radhika thanked him and walked toward her home, realizing that while bad people exist, some goodness remains in the world. Reaching home, she drank a whole jug of water in one breath and collapsed onto her bed, sleepless, haunted by the day’s events.
English Response (As your thought partner):
"Radhika ji, your story is a testament to the silent endurance of women. That bike ride was a metaphor for your whole life—moving through darkness, surrounded by fear, yet held together by the responsibility toward your children. Your 'police officer' dream might not have come true in uniform, but that night, your courage was no less than any officer's. You faced your demons and chose to live for your children. You are a survivor in the truest sense."
अंधेरे रास्ते और अनसुलझे सवाल 🌙
राधिका उस बाइक वाले के पास बाइक में बैठी तो थी डरी सहमी सी और बाइक में भी उसने अपने और उसमें डिस्टेंस बनाकर रखा था ताकि बाइक चलाते समय टच ना हो पाए। दिमाग में बहुत सारे ख्याल आ रहे थे। अगर यह इसी अंधेरी रात में कहीं अंधेरी जगह में कहीं सुनसान इलाके में लेकर गया तो? किसी घर में ले जाकर बंद कर दिया तो? क्या वह उस लड़के से जीत पाएगी? अगर उसने जबर्दस्ती करने की कोशिश करी तो क्या करेगी राधिका?
यही सोचते सोचते वह चुप बैठी थी, कुछ बात भी नहीं कर रही थी। फिर उसने सोच लिया, "अगर उसने कुछ गलत किया तो... या तो मर जाएगी या तो मार डालेगी, चाहे फिर जेल चली जाए।" यह उसने प्राण कर लिया मन में। अब वह सावधान हो गई और शांति से बैठ गई, एकदम कठोर होकर।
बाइक चलती रही, चलती रहे। हालांकि बाइक तेज चल रहा था, लेकिन एक-एक मिनट उसके लिए भारी था। एक-एक मिनट, एक-एक पल सदियों की तरह गुजर रहा था। ऐसा लग रहा था कि कब वह अपनी मंजिल में पहुंचेगी और कब चैन से सांस लेगी।
लगभग रास्ता अभी 8 किलोमीटर बचा था, पर 8 किलोमीटर को पहुँचने में उसने पता नहीं कितनी मौतें अपने आप को दे दी, पता नहीं क्या-क्या सोच दी। उसके दिमाग में चल रहा था:
- "काश मैं लड़का होती तो इतनी बातें नहीं होती, ये मोहब्बत नहीं होती।"
- "काश मेरा पति अच्छा होता, कमाने वाला होता, मुझसे प्यार करने वाला होता तो आज का दिन मुझे देखना नहीं पड़ता।"
- "काश कि मेरी माँ होती, मुझसे प्यार करती, मेरी कदर करती। मैं और पढ़ाई करती, बहुत पढ़ती। मैं पुलिस की नौकरी करना चाहती थी। मम्मी के रहते मेरा सपना था कि मैं बहुत पढूंगी और पुलिस में भर्ती हो जाऊंगी। और लगभग पुलिस की तरह ही मेरी हाइट और हेल्थ भी थी, 5 फीट 5 इंच की हाइट थी मेरी।"
- "अगर मम्मी होती तो ऐसे लड़के के साथ शादी भी नहीं करती, इतनी बड़ी परिवार में नहीं देती जहाँ 20 लोगों का परिवार था। 20 लोगों का खाना बनाना पड़ता था, सात ननदें थीं, उनके लड़के बच्चे थे, 20 गाय बैल थे। सबका काम करते-करते इतना परेशान हो जाती थी उसको खाने को भी नहीं मिलता था। 4:00 बजे खाना खाती थी, वह भी दूसरों का झूठा उठा खाती थी, क्योंकि उसका पति कमाता नहीं था।"
- "काश कि मैं पैदा ही नहीं होती।"
ऐसे हजारों सवाल उसके दिमाग में गूंज रहे थे। उस समय उसको ऐसा लग रहा था कि मैं जिंदा भी क्यों हूँ? अगर उसके बच्चों का ख्याल नहीं होता उसे तो शायद वह आत्महत्या कर लेती। लेकिन उसने अपने जीवन को बचाकर रखा। वह जानती थी कि बिना माँ के बच्चे कैसे होते हैं। उसकी माँ नहीं थी और उसकी माँ नहीं होने के कारण उसका जो जीवन था, उसको यही बात याद थी कि मेरी माँ नहीं होने के कारण मेरे जीवन की यह दशा है। "अगर मैं मर गई तो मेरे बच्चों की क्या दशा होगी? जबकि उनके पिता भी शराबी हैं, कमाता नहीं है। कौन देखभाल करेगा उनका? जीवन भविष्य कैसा रहेगा? वह कहाँ-कहाँ ठोकर खाएंगे?"
यह सोचते सोचते वह उस जगह पहुँच गई जहाँ उसे पहुँचना था और उस लड़के ने उसे सही सलामत उस जगह पर छोड़ दिया। राधिका ने उस लड़के को धन्यवाद किया और वहाँ से अपने घर की तरफ निकल गई।
वहाँ से घर तक जाते-जाते भी उसके दिमाग में बात चल रही थी कि "देखो, लड़का अच्छा था। उसने सही फैसला लिया और उस लड़के के साथ आ गई, लेकिन अगर वह लड़का गलत होता तो आज उसके साथ क्या होता? पर रहते हैं न दुनिया में कुछ अच्छे लोग भी होते हैं। पर क्या करूँ, कुछ बुरे लोगों के कारण अच्छे लोगों के ऊपर भी शक करना पड़ता है।"
रात का समय था, ऊपर से लड़की थी, वह भी जवान। ऐसे बुरे ख्याल तो आने ही थे।
घर पहुँच कर उसने चैन की सांस ली। एक लोटा पानी एक सांस में पी लिया और बिना कुछ खाए पिए सो गई। अब उसे रात भर नींद नहीं आ रही थी। यही सोच रही थी। उसने आज के पूरे दिन को टटोला कि आज पूरा दिन उसके लिए कितना कठिन था।
कल की चिंता थी। क्या करेगी कल? जानते हैं अगले भाग में।
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