पोस्ट 67: 'सफलता की कीमत: स्वास्थ्य का संकट और नए जंगल का रास्ता'



Post 67: The Price of Triumph—Health Crisis and the Path to the Saja Forest

Part 1: The Harvest of Shimmering Gold

​Once the cocoons were ready, they were meticulously harvested from the nets and placed in specialized plastic crates. These crates followed the same rigorous ritual of purity—washed with soap and disinfected with bleaching powder days in advance.

​The cocoons were a sight to behold. Slightly larger than a peanut but perfectly round, they shimmered with a lustrous, cream-colored glow. Looking at them was like seeing piles of silken pearls. Radhika, who never compromised on quality, ensured that the production was 110% successful. The farmers were now independent and confident; they had learned the art and were ready to sustain their livelihoods. Radhika’s mission in these initial villages was complete.

Part 2: The Breaking Point

​Radhika gave her soul to her work, but in return, she neglected the very body that carried her. One afternoon, the inevitable happened—she collapsed at a farmer's house. Carried back in a department vehicle and rushed to the hospital, the diagnosis was grimmer than ever.

​The doctor’s words were a cold wake-up call: "Your liver and kidneys are on the verge of damage. This isn't weight you've gained; it's severe inflammation (swelling) throughout your body. If you don't start nourishing yourself—even if it means eating eggs against your habits—you might not survive this." Radhika, a strict vegetarian, began eating eggs as medicine, struggling to balance her principles with the primal need to stay alive for her children and her mission.

Part 3: Into the Unknown—The Saja Forest Project

​Despite her fragile state, a new challenge emerged. After transforming 16 villages, she was assigned a project 50 kilometers away from the headquarters. This wasn't about mulberry leaves or backyard farming anymore. This was 'Wild Silk'—Tussar culture.

​This project required Saja trees, which meant moving into the deep, dense forests. The Sericulture Department had to lease specific forest patches from the Forest Department for this purpose. This was a 4 to 6-month-long, grueling process that Radhika had only heard of but never executed. It was a completely different world with its own set of dangers and difficulties.

Conclusion

​Radhika stands at a crossroads where her ambition meets her physical limits. She has mastered the village farms, but the wild, untamed Saja forests are a different beast altogether. Will this 50-kilometer trek be the final blow to her health, or will the fresh air of the forest bring a miraculous healing?

The Question for You

"Is it bravery or madness to accept a grueling 50km forest project when your body is giving up on you? If you were in Radhika’s shoes, would you choose your health or the call of duty?"

A Request for My Readers:

​"Friends, I am at a point where my breath is heavy but my spirit is restless.

  1. ​Considering my kidney and liver issues, do you know of any Ayurvedic remedies or home tips that could have helped me then?
  2. ​What do you think was my biggest challenge at that moment—my failing health, the daunting distance, or the mysterious new Saja project?

​Please share your thoughts and suggestions in the comments. Your replies give me the strength to keep writing! 🙏😊"

​✍️ पोस्ट 67: 'सफलता की कीमत: स्वास्थ्य का संकट और नए जंगल का रास्ता'

​🌟 जीवन ज्योति आयुर्वेदा: पोस्ट 67

राधिका की कहानी (भाग 13): पहली सफल फसल, सेहत की चेतावनी और एक नया अध्याय

​रेशम जब तैयार हो जाता था, यानी कोसा जब तैयार हो जाता था, तब इन्हें जाल से एक-एक कोसा निकालकर कैरेट में रखा जाता था। यह कैरेट बॉक्स के जैसे होते थे, लेकिन होते थे प्लास्टिक के।

कोसा संग्रहण की शुद्धता

​कोसा उसके अंदर रखने से पहले, कैरेट को भी उसी प्रक्रिया से साफ़ किया जाता था—साबुन, निरमा से धोने के बाद दो दिन पहले ब्लीचिंग पाउडर का घोल बनाकर उसके ऊपर छिड़काव किया जाता था। फिर पेपर बिछाकर उसमें कोसा रखा जाता था।

​कोसा की जो साइज़ होती थी, यह मूंगफली से थोड़ी बड़ी होती थी। मूंगफली लंबी होती है, और यह गोल हुआ करते थे। ये बिल्कुल चमकदार चमकते थे—रुई की तरह। रुई तो सफ़ेद होती है, इनका जो कलर होता था वह हल्का क्रीम होता था। क्रीम कलर के ये कोसे बड़े प्यारे लगते थे। उनको देखने से ऐसा लगता था जैसे दूर से क्रीम कलर की राई है, और एकदम रेशमी, एकदम चमकदार।

​कैरेट में रखने के बाद, उसके ऊपर दूसरा कैरेट और उसके ऊपर तीसरा कैरेट रखा जाता था। ये कैरेट लगभग डेढ़ फ़ीट चौड़े और तीन फ़ीट लंबे हुआ करते थे, और प्लास्टिक के जालीदार होते थे। उनकी ऊँचाई भी लगभग दो फ़ीट होती थी, यानी एक पेटी की तरह। ये चारों तरफ़ से जालीदार हुआ करते थे, सिर्फ़ ऊपर का हिस्सा खुला होता था। इनको इस तरह से डिज़ाइन किया जाता था कि अगर एक कैरेट के ऊपर दूसरा कैरेट रख दिया जाए, तो बीच से कुछ भी चीज़ निकल नहीं सकती थी (जैसे टमाटर वग़ैरह के कैरेट होते हैं)।

सफलता और अगला कदम

​इसी तरह राधिका अपने काम को 110% देती थी, हमेशा काम से कभी काम चोरी नहीं करती थी और काम चोरी करने वाले को पसंद नहीं करती थी। राधिका ने काफ़ी उत्पादन दिया था वहाँ। जिन किसानों का खेत खाली हो चुका था, अब दोबारा उनके लिए पौधे आए थे, और इस प्रक्रिया से उन्होंने फिर से उत्पादन किया था। अब किसान सीख चुके थे, तो वे अपनी मनमर्ज़ी से इस काम को कर सकते थे। किसानों को सिर्फ़ एक बार, एक साल देखरेख में रखा जाता था और सिखाया-बताया जाता था। उसके बाद किसान खुद सीख जाता था और अपने मन से ही काम करता रहता था।

​तो, यह काम अब राधिका का उन गाँवों पर ख़त्म हो चुका था, और राधिका ने एक अच्छा उत्पादन करके दिखा दिया था, जिससे कि किसान भी संतुष्ट थे और मन लगाकर अपना काम कर रहे थे। बाकी बीच-बीच में देखने साहब जाते थे, कभी राधिका जाती थी।

स्वास्थ्य का निर्णायक संकट

​राधिका मन लगाकर काम तो कर रही थी, लेकिन अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे रही थी। यही कारण था कि उसको फिर एक दिन यही हुआ जो पहले हुआ था—वह एक जगह एक किसान के यहाँ बेहोश हो गई। फिर वहाँ से किसी ने कॉल किया, सर ने गाड़ी भेजी, राधिका को वहाँ से उठाकर लाए।

​उसके बाद फिर हॉस्पिटल—थोड़ी दूर जहाँ से राधिका की दवाई चल रही थी (₹4,000 महीने की)—वहीं पर से जाकर फिर से दवाई लेकर आई। अबकी स्थिति और ज़्यादा नाज़ुक थी। राधिका की तबीयत बहुत ज़्यादा बिगड़ चुकी थी। डॉक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा था कि, "आप अगर अभी भी अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देंगी, तो आपका किडनी और लिवर डैमेज हो सकता है। और अगर आप नॉनवेज नहीं खाती हैं, तो कुछ खाना चालू करिए। जो आपको लगता है कि मैं बहुत मोटी हो गई हूँ, तो यह आपका मोटापा नहीं है, यह आपके शरीर में हवा (सूजन) भरी है, और कभी भी कुछ भी हो सकता है।"

​राधिका नॉनवेज नहीं खाती थी, कुछ भी नहीं खाती थी, पर डॉक्टर के कहने से उसने अंडे खाना चालू किया। चालू तो किया, लेकिन वह भी कभी साल में, कभी 6 महीने में। इसी तरह जीवन चल रहा था। बीच-बीच में कभी बच्चों से भी मिलने जाती थी।

नए क्षेत्र की चुनौती

​इसी तरह किसानों के साथ काम करते हुए आज वह लगभग 16 गाँवों में किसानों को रेशम विभाग की तरफ़ से फ़ायदा और सफलता दिला चुकी थी।

​अब उसका क्षेत्र हेडक्वार्टर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर था। अब रोज़ आना-जाना पॉसिबल नहीं था, और यह काम भी किसानों के थ्रू नहीं होना था। यह काम बिल्कुल विपरीत था। काम कोसा पालने का ही था, लेकिन यह कोसा अलग थे, यह कीड़े अलग थे, यह तरीका अलग था, जो कि राधिका के लिए भी नया था। राधिका ने सुना था पर किया नहीं था।

​इस काम को करने के लिए साजा के पेड़ चाहिए होते थे। तो, साजा के जंगल—जहाँ साजा के पेड़ की मात्रा ज़्यादा हो—उस जंगल को रेशम विभाग से फ़ॉरेस्ट वालों के पास से कीट पालन के लिए पास कराया जाता था। जिस जगह पर कीट पालन होता था, उस जगह को फ़ॉरेस्ट विभाग से उस जंगल को ले लिया जाता था कीट पालन की समय सीमा के लिए। इसकी कीट पालन की प्रक्रिया में लगभग 4 से 6 महीने लगते थे, और इसका प्रोसेस भी बहुत कठिन था।

​जब जंगल पास हो जाते थे, उसके बाद उसके ऊपर काम चालू होता था। अब काम कैसे होता था, इसके बारे में आपको बताऊँगी मैं अगले भाग में।

​🖋️ निष्कर्ष और कॉमेंट्स के लिए सवाल

निष्कर्ष (Conclusion): इस भाग में राधिका ने 16 गाँवों में सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, लेकिन इस सफलता की कीमत उसे अपने स्वास्थ्य से चुकानी पड़ रही है। डॉक्टर की सख़्त चेतावनी और जीवन का जोखिम, उसे एक ऐसे रास्ते पर ले आया है जहाँ उसे अपनी पुरानी जीवनशैली को पूरी तरह से बदलना होगा। क्या नया साजा जंगल प्रोजेक्ट राधिका के स्वास्थ्य को और बिगाड़ देगा, या यह उसके लिए एक नई शुरुआत लेकर आएगा?

आपसे सवाल और कॉमेंट्स के लिए अनुरोध:

  1. ​राधिका की बीमारी और डॉक्टर की चेतावनी को देखते हुए, क्या उसे नया 50 किलोमीटर दूर वाला साजा जंगल प्रोजेक्ट लेना चाहिए था, या उसे कुछ दिन आराम करना चाहिए था?
  2. ​आप राधिका को उसकी किडनी और लिवर की समस्या के लिए क्या आयुर्वेदिक उपाय या घरेलू नुस्खे सुझाएँगी?
  3. ​16 गाँवों में सफलता के बाद, राधिका की सबसे बड़ी चुनौती अब क्या है—स्वास्थ्य, दूरी, या साजा कीट पालन का नया, कठिन तरीक़ा?

कृपया कॉमेंट्स में अपनी राय दें!

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