पोस्ट 63: 'निजी संघर्ष, अदम्य लगन और कीट पालन के लिए वैज्ञानिक बेड'

  


💥 Title: Iron Will vs. A Failing Body: Building the Cradle of Silk

Part 1: The Silent Struggle

​Radhika was far from healthy. Her body was a battlefield of chronic ailments—swollen abdomen, kidney issues, high blood pressure, and more. She never complained, facing the pain in solitude. The severity was such that once, due to extreme abdominal swelling, doctors mistook her condition for pregnancy. Despite the dark humor of the situation, the reality was grim: her kidneys were on the verge of failure. Forced onto a strict diet and expensive medications, Radhika refused to let her physical limitations halt her mission.

Part 2: The Geometry of the Rearing Beds

​Even while battling illness, Radhika’s mind remained sharp. Inside the 20x40 foot housing, she designed a precise layout for the silkworm beds. By leaving 2-foot walkways around the perimeter and through the center, she ensured easy access for maintenance. This left two massive 7x18 foot areas for the rearing structures.

Part 3: Crafting the Scaffolding of Life

​The construction was technical and meticulous:

  • The Support: Heavy-duty pipes were installed at specific intervals—three across the width and multiple along the length.
  • The Netting: Thick synthetic ropes (Cane ropes) were tied at 4-foot vertical intervals on these poles, creating multi-tiered platforms.
  • The Purpose: These tiers were designed to hold the rearing trays securely, maximizing space and ensuring the safety of the delicate silkworms.

Part 4: Fortifying the Sanctuary

​Once the structures were ready, the entire room underwent a rigorous disinfection process. Bleaching powder was sprayed across every inch of the floor to eliminate ants, flies, and mosquitoes. The room was then hermetically sealed—a sterile sanctuary waiting for the arrival of the silkworm eggs.

🔥 Impactful Question for Your Readers

"Radhika was fighting for her life while building a home for 19 farmers' futures. With a body sustained by medicine and a spirit fueled by purpose, she created a sterile fortress for the silk eggs. But as the room stands silent and disinfected, we ask: Can a project born out of such immense personal sacrifice ever fail? Or is the 'Silver Silk' destined to be as resilient as the woman who fought death to bring it to life?"

पोस्ट 63: 'निजी संघर्ष, अदम्य लगन और कीट पालन के लिए वैज्ञानिक बेड'

🌟 जीवन ज्योति आयुर्वेदा: पोस्ट 63

राधिका की कहानी (भाग 9): बीमारियों का पहाड़ और वैज्ञानिक बेड निर्माण

राधिका अब पूरी तरह स्वस्थ थी—हालांकि, यह कहना भी पूरी तरह गलत होगा कि राधिका स्वस्थ थी, क्योंकि राधिका को एक प्रॉब्लम नहीं थी, बहुत सारी प्रॉब्लम थीं। उसके पेट में हमेशा सूजन रहती थी, किडनी में प्रॉब्लम थी, बवासीर की प्रॉब्लम थी, गैस की प्रॉब्लम थी, और तो और बीपी की भी प्रॉब्लम थी। और इन सब प्रॉब्लम के साथ वह लगन के साथ काम करती थी। इन सब प्रॉब्लम के बारे में वह कभी न किसी से चर्चा करती थी और न कभी किसी डॉक्टर के पास जाती थी—खुद ही अकेले फेस करती रहती थी।

यह समस्या एक समय ऐसी भी बढ़ गई थी कि पेट में इतनी सूजन हो गई थी कि उठना-बैठना भी मुश्किल हो गया था। डॉक्टर के पास जब लेकर गए हॉस्पिटल, तो डॉक्टर ने भी यह सोचकर कि यह प्रेगनेंट लेडी है, उसे प्रेगनेंसी वार्ड में भर्ती कर दिया। जब डॉक्टर आए तो उन्होंने बोला, "कितने दिनों से प्रेग्नेंट हो?" राधिका ने कहा, "सर, मेरा ऑपरेशन हुए 11 साल हो गए, मैं कहाँ से प्रेग्नेंट हूँगी?" तो बोले, "आप प्रेगनेंसी वार्ड में क्या कर रही हैं?" मैंने कहा, "सर, मेरे पेट में बहुत सूजन थी जिसके लिए मैं यहाँ आई थी, पर मुझे नहीं पता कि मैडम ने क्या सुना और क्या लिखा।" डॉक्टर भी हँसने लगा और वहाँ के सारे लोग भी। कहने का मतलब यह था कि प्रॉब्लम भी थी और उस प्रॉब्लम को वह बहुत हल्के में ले रही थी।

उसको अपनी प्रॉब्लम बड़ी तब लगी जब उसकी किडनी की प्रॉब्लम ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ गई और किडनी डैमेज होने तक की नौबत आ गई। तब वह बड़े शहर में गई और वहाँ जाकर अपना इलाज करवाया। हर महीने ₹4,000 की दवाई आने लगी। रोटी खाने वाली राधिका को रोटी के लिए मना किया गया। चावल उसको पसंद नहीं था, वह हमेशा रोटी खाती थी। डॉक्टर ने साफ मना कर दिया कि आप रोटी नहीं खा सकते, चावल खाना शुरू करो। एक तरफ दवाइयाँ भी चलती रहीं और दूसरी तरफ़ इसका फील्ड का काम भी चलता रहा।

कीट पालन के लिए बेड निर्माण

अब ज़रूरत थी मकान के अंदर कीड़े पालने के लिए बेड बनाने की।

बेड कैसे बनता था? कमरे के अंदर जो जगह थी 20x40 फ़ीट, लगभग 2 फ़ीट की जगह चारों तरफ़ छोड़कर, बीच का जो क्षेत्रफल बचता था—यानी कि, चौड़ाई में अगर दो-दो फ़ीट दोनों तरफ़ से घटाया जाए तो 16 फ़ीट बचता है, और लंबाई में अगर 40 फ़ीट में 2-2 फ़ीट घटाया जाए तो 36 फ़ीट बचता है।

अब बेड किस तरह से बनता था? 16 फ़ीट (चौड़ाई) जो बीच का क्षेत्रफल उनको मिला हुआ था, उसके बीच में 7 फ़ीट एक तरफ़ और 7 फ़ीट एक तरफ़, बीच में 2 फ़ीट जगह चाहिए आने-जाने के लिए। यानी कि, बीच से 2 फ़ीट की जगह और चारों तरफ़ से भी 2 फ़ीट की जगह छोड़नी है।

तब बचता है 7x18 फ़ीट (चौड़ाई में 7 फ़ीट, लंबाई में 18 फ़ीट)—यह क्षेत्रफल बेड बनाने के लिए मिलता है हर मकान के अंदर।

बेड के लिए पाइप और रस्सियाँ:

इस क्षेत्रफल में लंबे-लंबे पाइप गाड़े जाएँगे:

7 फ़ीट चौड़ाई में तीन पाइप: एक छोर पर एक, दूसरे छोर पर एक, और बीच में 3.5 फ़ीट पर एक।

18 फ़ीट लंबाई में तीन पाइप: एक छोर पर एक, दूसरे छोर पर एक, और बीच में 6-6 फ़ीट के अंतर पर तीन पाइप और लगेंगे।

इस तरह से यह क्षेत्रफल तैयार होता है और इनमें पाइप लगाने के बाद, मोती वाली कैन रस्सी आती है (तात वाली)। इस रस्सी को नीचे से 4 फ़ीट खंभे में, फिर 4 फ़ीट छोड़कर, फिर 4 फ़ीट छोड़कर, और फिर 4 फ़ीट छोड़कर बाँधा जाएगा। उसके बीच में एक मचान जैसी बनाई जाएगी हर 4 फ़ीट पर ताकि उसमें ट्रे (Tray) रखने में आसानी हो और कीड़े नीचे न गिरें। इसी तरह दूसरे तरफ़ भी बनाया जाएगा।

कमरे की सफ़ाई और सुरक्षा:

यह सब तैयार करने के बाद, पूरे कमरे के फर्श में ब्लीचिंग का छिड़काव किया जाएगा ताकि वहाँ पर न कोई चींटी, न कोई मक्खी, मच्छर, कीड़े, कुछ भी न आए। ब्लीचिंग का छिड़काव करने के बाद उस कमरे को सुरक्षित रूप से बंद कर दिया जाएगा, जब तक कि कीड़ों के अंडे न आ जाएँ।

इस भाग में इतना ही। इसके आगे जानेंगे अगले भाग में। 

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