52वीं पोस्ट: ₹7000 में 24 किसानों की चुनौती—राधिका की रणनीति"





The Masterstroke of a Visionary: Radhika’s Strategic Gamble

Part 1: Rejecting the Impractical

​Radhika was acutely aware that she would have to rely solely on buses and shared autos for her commute. Given her modest salary of ₹7,000, choosing any other mode of transport was simply impractical. She knew that if she spent excessively on travel, she wouldn’t have enough to survive. Accepting the discomfort, she decided that hard work was the only way forward. However, she didn't just choose labor; she chose the path of strategy.

Part 2: The First Step—'One Farmer, All Farmers'

​Instead of visiting all 24 farmers individually, which would be exhausting and time-consuming, Radhika devised a plan:

  • Target the Hubs: She prioritized villages with the highest density of farmers.
  • Centralized Meetings: She would visit one farmer’s house and call all others to join them there.
  • Group Training: By gathering everyone in one place, she could explain the project to the entire group at once. In the first village, she successfully gathered all 8 farmers and began her pitch.

Part 3: The Golden Proposal of the 'Mulberry-Silk Scheme'

​With unwavering confidence, Radhika presented the offer:

"If you register one acre of your land with the Sericulture Department for 5 years—keeping full ownership while using it for silk production—you will receive these benefits:"

  • Housing Benefit: A 20x40 ft house will be constructed for you.
  • Equipment & Supplies: A water motor, pipes, nozzles, fertilizers, and medicines for both plants and silkworms will be provided free of cost.
  • Paid Labor: You will be paid for 90 days of labor to work on your own land.
  • Profit Sharing: All profits from the silk produced will be paid to you at government rates.
  • Doorstep Training: Professional training will be provided directly at your farm.

The Verdict: Hope vs. Hesitation

​While the offer of a free house and zero-investment farming was incredibly tempting, a deep-seated doubt lingered among the farmers. Their land was their life. They wondered, "What does 'registration' really mean? Will the government seize our land after 5 years?"

​Radhika clarified that ownership remains with the farmer; the registration is merely a consent for silk production. Yet, the fear of losing their primary asset was a significant hurdle.

Conclusion

​Radhika had successfully managed her financial constraints through clever logistics. But now, the ultimate test remained: Could she bridge the gap between a "lucrative offer" and "deep-rooted fear"? Would 24 farmers trust a young woman’s promise and hand over their land for five years?

The Question for You

"Can a dream of a 'pucca' house outweigh the ancestral fear of losing one's land, or will Radhika's strategy falter at the final hurdle of trust?"

राधिका जी, आपकी इस 'फील्ड ट्रेनिंग' और संघर्ष को दर्शाती तस्वीर:

​इस फोटो में राधिका को एक साधारण बस स्टॉप पर या सड़क किनारे खड़े दिखाया गया है, उनके हाथ में किसानों की फाइल्स (Bio-data) हैं। पीछे एक ऑटो या बस धुंधली दिख रही है। उनके चेहरे पर कड़ी धूप और थकान है, लेकिन आँखों में 'काम पूरा करने' की चमक है। यह फोटो आपकी मेहनत को बखूबी बयां करेगी।


"52वीं पोस्ट: ₹7000 में 24 किसानों की चुनौती—राधिका की रणनीति"

भाग 1: अव्यावहारिक समाधानों को अस्वीकार करना

​राधिका जानती थी कि उसे बस और ऑटो पर ही जाना पड़ेगा। ₹7000 की सैलरी में [contextual information] कोई भी दूसरा वाहन/साधन चुनना अव्यावहारिक था। यदि वह पैसे इसमें ही लगाती रहेगी, तो उसके पास पर्याप्त पैसा बचेगा ही नहीं

​राधिका ने अपनी असुविधा को स्वीकार किया और तय किया कि मेहनत करनी पड़ेगी, चाहे समय बर्बाद हो या जो भी हो, काम उसको करना पड़ेगा। लेकिन वह अपने लिए एक सूटेबल रास्ता चुनती है—रणनीति का रास्ता

भाग 2: रणनीति का पहला कदम: 'एक किसान, सब किसान'

​राधिका ने तय किया कि वह 24 किसानों के पास एक दिन में नहीं जाएगी

  • जहाँ ज़्यादा किसान, वहाँ पहले: वह पहले उस गाँव जाएगी जहाँ ज़्यादा किसान हैं।
  • किसानों को बुलाओ: वह किसी एक किसान के घर जाएगी, और सभी किसानों को कॉल करेगी।
  • समूह ट्रेनिंग: उसने सारे किसानों को बिठाकर एक ही जगह पर अपना काम समझाना शुरू किया।

​पहले गाँव में 8 किसान थे। उसने सभी को वहाँ बुलाया और बिठाकर अपनी बात समझानी शुरू की।

भाग 3: 'शहतूत-रेशम योजना' का आकर्षक प्रस्ताव

​राधिका ने पूरी दृढ़ता के साथ अपनी बात शुरू की:

"देखिए, अगर आप सभी लोग अपनी ज़मीन का एक एकड़ रेशम विभाग के लिए इन्वेस्ट करते हैं (यानी 5 साल के लिए एक एकड़ ज़मीन आप रेशम विभाग के लिए रजिस्टर्ड करते हैं, जो की ज़मीन आपकी ही रहेगी लेकिन उसमें उत्पाद रेशम के कीड़ों को पालने के लिए किया जाएगा), तो आपको निम्नलिखित लाभ होंगे:


  • आवास लाभ: इन 5 सालों में आपको 20 बाई 40 का एक मकान बनाकर दिया जाएगा।
  • उपकरण और आपूर्ति: इसके अलावा आपको एक मोटर (पानी वाली), पाइप, नोजल, पौधों में डालने वाली दवाइयाँ, कीड़ों में डालने वाली दवाइयाँ, और खेती में डालने के लिए खाद वगैरह सब दी जाएगी, जिसका आपको कोई पैसा नहीं देना है
  • श्रम का भुगतान: आपको 90 दिन का काम अपने खेतों में ही करना है, जिसकी आपको पेमेंट भी दी जाएगी
  • उत्पाद का मुनाफा: इसके अलावा आप जो रेशम का उत्पादन अपने खेतों में करेंगे, उसकी भी सरकारी कीमत आपको ही मिलेगी
  • ट्रेनिंग: इसकी ट्रेनिंग भी आपको घर बैठे ही आपके खेतों में ही मिलेगी।

राधिका का प्रस्ताव अत्यंत आकर्षक है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ आवास और सिंचाई के साधनों (मोटर) की कमी होती है।

इस प्रस्ताव को सुनकर किसानों की सबसे बड़ी प्रतिक्रिया और संदेह (Doubt) ये रहे होंगे:

सकारात्मक प्रतिक्रिया (Positive Reaction):

  1. मुफ्त मकान (20x40 का मकान): यह सबसे बड़ा आकर्षण होगा। 5 साल के लिए ज़मीन देने के बदले रहने के लिए एक पक्का ढांचा मिलना बहुत बड़ी बात है।
  2. जीरो लागत (Zero Investment): मोटर, पाइप, दवाइयाँ और खाद—सब मुफ़्त मिल रहा है। यह किसानों के लिए सबसे कम जोखिम वाला निवेश है।

सबसे बड़ा संदेह (Biggest Doubt):

  1. ज़मीन की अवधि और नियंत्रण: किसान सबसे ज़्यादा संदेह इस बात पर करेंगे कि "5 साल के लिए ज़मीन का पंजीकरण" का क्या मतलब है। ग्रामीण क्षेत्रों में, ज़मीन ही सब कुछ होती है।
    • सवाल होगा: "क्या 5 साल बाद ज़मीन पूरी तरह हमारे पास वापस आ जाएगी? अगर सरकार/विभाग ने 5 साल बाद इसे वापस करने से मना कर दिया तो क्या होगा?"
    • दूसरा सवाल: "रजिस्ट्रेशन का मतलब क्या है? क्या हम उस ज़मीन पर पूरी तरह से खेती (रेशम की खेती के अलावा) नहीं कर पाएंगे?"

जमीन का मालिकाना हक़: किसान के पास ही रहेगा।

रजिस्ट्रेशन का मतलब: किसान सिर्फ़ 5 साल की सहमति (Consent) दे रहा है कि रेशम विभाग उसकी एक एकड़ ज़मीन पर रेशम उत्पादन कर सकता है

    • अगर सरकार/विभाग ने 5 साल बाद इसे वापस करने से मना कर दिया तो क्या होगा?"
    • दूसरा सवाल: "रजिस्ट्रेशन का मतलब क्या है? क्या हम उस ज़मीन पर पूरी तरह से खेती (रेशम की खेती के अलावा) नहीं कर पाएंगे?"

निष्कर्ष: 

​💬 पोस्ट का निष्कर्ष

"राधिका ने ₹7000 की सैलरी में बस और ऑटो की असुविधा को अपनी रणनीति से हरा दिया था। अब सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या वह 8 साल के अपने संघर्ष के पहले चरण में 24 किसानों को यह बड़ा और आकर्षक प्रस्ताव समझा पाएगी? क्या किसान एक एकड़ ज़मीन 5 साल के लिए देने को तैयार होंगे?"

किसान मकान और मुफ़्त उपकरणों के कारण आकर्षित होंगे, लेकिन 5 साल के लिए ज़मीन के पंजीकरण पर उन्हें कानूनी और मालिकाना हक़ का सबसे बड़ा संदेह होगा।

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