अंतिम अंधकार: डिप्रेशन, पागलपन और चार बच्चों के बाप से शादी" भाग
"अंतिम अंधकार: डिप्रेशन, पागलपन और चार बच्चों के बाप से शादी"
भाग 1: डिप्रेशन और जीवन की चाहत का अंत
राधिका की स्थिति अब बहुत गंभीर हो चुकी थी। वह बहुत डिप्रेशन में जा चुकी थी, इतनी बीमार हो गई थी कि अब उसको जीने की चाहत ख़त्म हो गई थी।
24 घंटे बस वह यही चीज़ सोचती रह गई कि:
पूरी जीवन भर की जमा पूँजी जहाँ ख़र्च की, जिसके पीछे बर्बाद हुई, आज वह इंसान नहीं समझ रहा है।
और उसके पीछे बर्बाद हुआ उसका जीवन साथी का जीवन भी बर्बाद हो गया।
उसे लगता था कि इसकी ज़िम्मेदार मैं हूँ।
24 घंटे उसके दिमाग़ में कुछ न कुछ चलता रहता था। वह डिप्रेशन में जाती रहती थी। कुछ खाना नहीं खाती थी, रात-रात भर जागती रहती थी, उसको नींद नहीं आती थी।
भाग 2: डॉक्टरों का जवाब
बहुत दिनों तक तो उसका सरकारी hospital में इलाज चल रहा था फिर जब राधिका को लगा कि यहां उसकी तबीयत ठीक होने वाली नहीं है तो उसने वहीं के एक मनो वैज्ञानिक डॉक्टर को दिखाया और सारी बातें बताई कि उसकी क्या स्थिति है डॉक्टर के पास गई तो उसने उसे नींद की गोली दी 5 दिन के लिए। 5 दिन के बाद वापस बुलाया 5 दिन तक वह नींद की गोली खाने के बाद भी उसको नींद नहीं आई। फिर वह उसी डॉक्टर के पास गई।
डॉक्टर ने बोला, "मैडम, आप ऐसे ही रहोगे। डिप्रेशन में जा रहे हो आप।" और ऐसी स्थिति रही तो, "कुछ दिन के बाद आप पागल हो जाओगे और आपको संभालना बहुत मुश्किल हो जाएगा।" डॉक्टर ने कहा, "हमारे हाथ से बात निकल जाएगी।"
इसलिए आप थोड़ा ध्यान रखो अपना। इतना मत सोचो, दिमाग़ को थोड़ा शांत रखो, सोने की कोशिश करो, कुछ खाना-पीना चालू करो, फल-फूल खाओ, थोड़ी ताक़त आए शरीर में।"
वह एकदम दुबली हो गई थी। जो बात को सोचती तो सोचती रहती, हँसती तो हँसती रहती, बोलती तो बोलती रहती। ऐसी स्थिति हो गई थी। महीना-महीना उसके पेट में दाना नहीं जाता था, ऐसी उसकी हालत हो गई थी।
भाग 3: पापा का अंतिम विनाशकारी फ़ैसला
पंडित जी भी फ़ोन करते थे पर बात नहीं करती थी। पंडित जी ने सिर्फ़ एक ही बात समझी कि अब इसको जीवन के लिए कोई न कोई सहारा होना चाहिए। अगर यह अकेली रहेगी तो मर जाएगी।
ऐसी स्थिति में राधिका के पापा के पास ख़बर पहुँचाई गई।
पापा ने कहीं लड़का देखा और शादी करने की सोची। राधिका को ख़ुद का होश नहीं था। राधिका कुछ नहीं जानती थी कि आसपास उसकी दुनिया में क्या हो रहा है। वह अपने आप को भूल बैठी थी, पागलों जैसी उसकी हालत हो गई थी। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था। कोई एक हाथ उसके सर पर रखने वाला कोई नहीं था।
दुखद सत्य: घर की हालत भी बहुत ख़राब थी। घर में कुछ भी नहीं बचा था। बर्तन भी, पलंग था, कुर्सियाँ थीं, पर खाने को दाना नहीं था, रूम का किराया नहीं था, पागलों जैसी हालत थी!
निर्णय: पापा को एक लड़का मिला—चार बच्चों का बाप था! पता नहीं पापा ने क्या सोचा और उसकी शादी करवा दी!
पापा को यह बात अच्छे से पता थी कि पहली बार वह ज़िंदगी उसकी बर्बाद कर चुके हैं एक ऐसी लड़की के साथ शादी करके जिसकी उम्र उससे दोगुनी थी एक शराबी और जुआरी था और यह लड़का उससे भी बड़ा था और चार बच्चों का बाप था!
राधिका दूसरी शादी के पूरी तरह ख़िलाफ़ थी।
💬 पोस्ट का निष्कर्ष
"डिप्रेशन के अंतिम चरण में, जब राधिका को ख़ुद का होश नहीं था, उसके पिता ने एक ऐसा फ़ैसला लिया, जो उसकी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल सकता था। राधिका दूसरी शादी के ख़िलाफ़ थी, पर अब वह चार बच्चों के बाप की पत्नी बनने जा रही थी। क्या यह विवशता भरा कदम उसे सहारा देगा, या उसका जीवन संवर जाएगा? देखते हैं अगले भाग में
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