"53वीं पोस्ट: 21 किसानों का विश्वास और 2 महीने का सरकारी संघर्ष

 


💥 Title: The Battle of Paperwork: 21 Farmers and a 2-Month Bureaucratic War

Part 1: Strategy in the Field—Winning Over the Farmers

​Radhika stepped into her battlefield with a sharp strategy. To manage within her ₹7,000 salary, she didn't visit everyone individually. Instead, she gathered groups of farmers at a single location. Her proposal was irresistible: free fertilizer, equipment, labor payments, and a new house, all while the farmers retained ownership of their land. In just 8 days, her persuasion worked like magic—21 out of 24 farmers handed over their biodata. Her superiors were stunned by her 90% success rate.

Part 2: The Quagmire of Documents

​The real struggle began after the "Yes." Collecting files for 21 farmers meant dealing with missing Aadhaar cards, bank passbooks, and land records (Khasra-Naksha). It was Radhika’s responsibility to fix every discrepancy. She had to meticulously organize these files according to the Sericulture Department’s norms before presenting them to the Janpad Panchayat.

Part 3: The 50-KM Sprint and Systemic Hurdles

​The Janpad Panchayat office was 50 kilometers away from the headquarters. For two grueling months, Radhika was caught in a cycle of travel and rejection. The CEO (Chief Executive Officer) was often unavailable, or would pose "50 questions" just to delay the process. Sometimes, she would miss her bus or auto and get delayed, stalling the work further. The bureaucracy tested her patience at every step.

Part 4: The Victory of 19 Files

​After months of persistence, the CEO finally cleared the files, though he canceled two due to "unclear data." Radhika didn't complain; she took the 19 approved files as a major victory. Exhausted but triumphant, she returned to the headquarters. The mission to transform these 19 farms was now officially on.

🔥 Impactful Question for Your Readers

"Radhika proved that 'Fieldwork' isn't just about plants; it's about navigating the complex web of government offices and human ego. She turned 21 'No's' into 19 'Approved' files through sheer grit. But as the paperwork ends and the actual plantation begins, will the 19 farmers stand by her, or will new hurdles arise on the ground?"

"53वीं पोस्ट: 21 किसानों का विश्वास और 2 महीने का सरकारी संघर्ष"

भाग 1: रणक्षेत्र का पहला हफ़्ता—24 में से 21 किसान तैयार

राधिका अब अपने रणक्षेत्र में पहुँच चुकी थी। उसे अपनी काबिलियत और एक्सपीरियंस से किसानों को फ़ायदा दिलाना था। उसने अपनी ₹7000 सैलरी की सीमा में काम करने के लिए एक शानदार रणनीति अपनाई:

पहला गाँव (8 किसान): उसने 8 किसानों को एक जगह बुलाया। उसका आकर्षक प्रस्ताव (मकान, मुफ़्त खाद, उपकरण, श्रम का भुगतान, और ज़मीन पर मालिकाना हक़) इतना मज़बूत था कि 7 किसानों ने तुरंत हाँ भर दी और बायोडाटा बनाने को तैयार हो गए।

अन्य गाँव (16 किसान): राधिका ने बाकी बचे 16 किसानों तक भी वही रणनीति दोहराई, जहाँ 6 लोग, 3 लोग, 4 लोग और फिर 3 लोग थे। जहाँ 6 लोग थे, वहाँ भी उसने सभी 6 को एक साथ एक किसान के घर बुलाया, और पूरे 6 किसान तैयार हो गए।

इस काम को देखते हुए सर बहुत खुश थे कि उसने लगभग 90% का रेशियो लिया है। लगभग 8 दिन लगे राधिका को पूरे 24 किसानों से मिलने में, जिसमें से उसने कुल 21 किसानों की फाइलें इकट्ठी कर ली थीं।

भाग 2: कागज़ात का दलदल—जनपद पंचायत के चक्कर

अब राधिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी: सरकारी कागज़ात।

7 और 6 मिलाकर 13 किसानों की फाइलें राधिका के हाथ में थीं, लेकिन इनमें कुछ न कुछ कमी थी—किसी का आधार कार्ड नहीं था, तो किसी का पासबुक नहीं, किसी का खसरा नक्शा निकलवाना था। यह सारी चिंता और टेंशन राधिका को ही दूर करनी थी।

इस काम को आगे बढ़ाने के लिए, राधिका को इन फाइलों को सर से जाँच करवाकर, उनमें रेशम विभाग की योजना के हिसाब से और फाइलें जोड़कर जनपद पंचायत ले जाना था। वहाँ यह फाइल CO (मुख्य कार्यपालन अधिकारी) के पास पास होना थी।

भाग 3: 50 किलोमीटर की दौड़ और 2 महीने की देरी

राधिका के हेडक्वार्टर से जनपद पंचायत बहुत दूर थी, लगभग 50 किलोमीटर। वहाँ जाकर दो महीने तक चक्कर काटना और फिर फाइल पास करवाकर लेकर आना बहुत टफ था।

सरकारी बाधाएँ: कभी सीईओ नहीं मिलते थे, कभी मिलते थे तो कोई बहाना मार देते थे। कभी '50 सवाल' करते थे, तो कभी कहते थे कि किसानों को बुलाकर लाओ।

परेशानियाँ: कभी-कभी ऑटो-बस नहीं मिलने के कारण भी राधिका लेट हो जाती थी, और लेट होने के कारण उसका काम रुक जाता था।

बहुत सारी चीज़ों को फेस करते हुए, राधिका ने उन फाइलों को पास करवाया। अंत में, सीईओ ने दो फाइलें कैंसिल कर दीं क्योंकि उनमें 'डेटा क्लियर नहीं था'। आखिरकार, 19 फाइल ही पास हो पाईं।

भाग 4: 19 फाइलों की जीत

फाइल पास करवाकर राधिका के लिए हेडक्वार्टर वापस आना भी एक चुनौती थी। लेकिन राधिका कहाँ हार मानने वाली थी? 19 किसानों की फाइलों की जीत लेकर, वह वापस हेडक्वार्टर पहुँची।

💬 पोस्ट का निष्कर्ष

"दो महीने की भाग-दौड़ और सरकारी हीला-हवाली झेलने के बाद, राधिका ने 19 किसानों की फाइलों को पास करवा लिया था। अब उसके सामने अगली चुनौती थी—इन पास हुई फाइलों पर काम शुरू करवाना। 8 साल के संघर्ष का यह सबसे जटिल चरण था। अब राधिका क्या करेगी? क्या उसे 19 किसानों की फाइलें पास करवाने के बाद भी कोई नई बाधा मिलेगी? यह हम जानेंगे अगले भाग में

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