राधिका की डायरी पहली कमाई की महक, ज़िम्मेदारियों का ताना-बाना और मुस्कुराता परिवार
राधिका की डायरी पहली कमाई की महक, ज़िम्मेदारियों का ताना-बाना और मुस्कुराता परिवार आखिरकार, मेरे बेटे ने अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत कर ही दी। उसकी दिनचर्या अब पूरी तरह बदल चुकी थी। सुबह ठीक 8:00 बजे से लेकर दोपहर 1:00 बजे तक वह पूरी एकाग्रता के साथ अपनी कंप्यूटर क्लास करता था। अपनी पढ़ाई के प्रति उसकी यह लगन देखकर मेरा दिल गर्व से भर जाता था। लेकिन कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती थी; दोपहर 1:00 बजे जैसे ही कंप्यूटर क्लास ख़त्म होती, वह बिना एक पल गंवाए अपने डिलीवरी बॉय के काम के लिए निकल पड़ता था। मगर इस नए रास्ते में भी एक अड़चन आ खड़ी हुई। डिलीवरी बॉय की नौकरी के लिए ड्राइविंग लाइसेंस का होना अनिवार्य था, जो अभी हमारे पास नहीं था। इस मुश्किल को हल करने के लिए मुझे खुद आगे आना पड़ा। मैं अपने बेटे के साथ उसके ऑफिस गई और मुझे उसके बॉस से सीधे बात करनी पड़ी। मैंने आरटीओ (RTO) से मिली सरकारी रसीद उनके सामने रखी और बेहद शालीनता से कहा, "सर, यह लाइसेंस की पावती (Receipt) है। कृपया आप अभी इससे काम चला लीजिए, असली लाइसेंस 15 दिनों के भीतर बनकर मिल जाएगा।" उनके बॉस बहुत भल...