राधिका की डायरी Faith Amidst the Financial Storm ​(आर्थिक तूफान के बीच अटूट विश्वास) भाग 441

 

राधिका की डायरी

Faith Amidst the Financial Storm 

(आर्थिक तूफान के बीच अटूट विश्वास) भाग 441

​The vow of Lord Satyanarayan's 'Udyapan' stood before Radhika like a mountain she wasn't prepared to climb. With empty pockets and the world still gripped by the Corona lockdown, the task seemed impossible. Tradition demanded inviting all relatives and bringing her son home, but how could she afford the feast or the travel? While she was still immersed in her product training, her mind was constantly calculating the costs she couldn't cover. Yet, as she looked at her 440 blog posts, she remembered that she had survived worse storms. She wondered if her devotion would find a way through the restrictions of the lockdown and her financial crisis.

कहानी का हिंदी अनुवाद

​भगवान सत्यनारायण के 'उद्यापन' का संकल्प राधिका के सामने एक ऐसे पहाड़ की तरह खड़ा था जिसे चढ़ने के लिए वह तैयार नहीं थी। खाली जेब और कोरोना लॉकडाउन की गिरफ्त में फंसी दुनिया के बीच, यह काम नामुमकिन लग रहा था। परंपरा के अनुसार सभी रिश्तेदारों को बुलाना और बेटे को घर लाना ज़रूरी था, लेकिन वह दावत या आने-जाने का खर्च कैसे उठाएगी? जहाँ एक तरफ उसकी प्रोडक्ट ट्रेनिंग अभी भी चल रही थी, वहीं उसका दिमाग लगातार उन खर्चों का हिसाब लगा रहा था जिन्हें वह पूरा नहीं कर सकती थी। फिर भी, जब उसने अपनी 440 ब्लॉग पोस्टों को देखा, तो उसे याद आया कि उसने इससे भी बुरे तूफानों का सामना किया है। वह सोच रही थी कि क्या उसकी भक्ति लॉकडाउन की पाबंदियों और आर्थिक संकट के बीच से कोई रास्ता निकाल पाएगी।

निष्कर्ष (Conclusion)

​जब जेब खाली हो और संकल्प बड़ा, तो परीक्षा सिर्फ इंसान की नहीं, बल्कि उसके ईश्वर पर भरोसे की भी होती है।

आज का सवाल (Strong Question)

"क्या कभी आपके जीवन में भी ऐसा समय आया है जब आपकी श्रद्धा और आपकी मजबूरी के बीच युद्ध छिड़ा हो?"

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भाग 4 = एक नया मोड़ टर्निंग प्वाइंट

भाग 3 = शुभ दीपावली जैसे दीपावली में दीपक की रोशनी से घर में उजाला हो जाता है वैसे ही मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सब के जीवन से दुख परेशानी चिंता उदासी हमेशा हमेशा के लिए चली जाए खुशी मुस्कुराहट सुख समृद्धि धन वैभव हमेशा हमेशा के लिए रोशनी बन कर आ जाए शुभ दीपावली

' भाग 1= पाँचवी पास ने क्यों शुरू किया आयुर्वेद का बिज़नेस? मेरी कहानी!'